ईरान करेंसी में बड़ा बदलाव – 4 शून्य हटाए जाने के बाद 10,000 ईरानी रियाल होंगे 1 नया रियाल

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ईरान , 06 अक्टूबर 2025 । ईरान ने अपनी मुद्रा रियाल को स्थिर और सरल बनाने के लिए एक बड़ा आर्थिक कदम उठाया है। ईरानी सरकार ने घोषणा की है कि देश की करेंसी से चार शून्य (0000) हटा दिए जाएंगे। इसका मतलब यह हुआ कि अब 10,000 पुराने रियाल को 1 नया रियाल के रूप में बदला जाएगा। यह कदम मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक लेन-देन को आसान बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।

ईरान अपनी करेंसी रियाल से 4 जीरो हटाने जा रहा है। आसान तरीके से समझे तो जल्द ही 10,000 रियाल की कीमत सिर्फ 1 रियाल होगी। इसे ईरानी संसद की मंजूरी मिल गई है। यह कदम बढ़ती महंगाई की वजह से उठाया गया है।

फिलहाल, इंटरनेशनल मार्केट में 1 डॉलर के वैल्यू 11.50 लाख रियाल पहुंच चुकी है। ये प्रस्ताव को कई साल से तैयार किया जा रहा था।

ईरानी संसद की आर्थिक समिति के प्रमुख शम्सोल्दीन हुसैन ने सरकारी टीवी को बताया कि ये बदलाव 2 साल बाद लागू होगा। बदलाव के बाद भी पुरानी रियाल करेंसी को तीन साल तक इस्तेमाल किया जा सकेगा।

मंहगाई से बचने के लिए ईरान ने उठाया कदम

यह कदम मुख्य रूप से मुद्रा के अवमूल्यन (devaluation) और उच्च मुद्रास्फीति (inflation) से निपटने के लिए उठाया गया है।

  • उच्च मुद्रास्फीति (मंहगाई): ईरान में पिछले कई वर्षों से मुद्रास्फीति 30-40% से ऊपर बनी हुई है। मई 2025 में यह 38.7% थी।
  • खरीदारी में बड़े नबर का इस्तेमाल: रियाल की कीमत इतनी गिर चुकी है कि 1 अमेरिकी डॉलर के लिए लगभग 1,150,000 रियाल लगते हैं। इससे बिल, बैंक स्टेटमेंट और दैनिक खरीदारी में बड़े-बड़े नंबर्स (जैसे लाखों-करोड़ों) का इस्तेमाल होता है, जो जटिल है।
  • नोट छपाई की लागत कम करना: बड़े नोट छापने और हैंडल करने में ज्यादा खर्च होता है। छोटे नंबर्स से प्रिंटिंग और लॉजिस्टिक्स सस्ती हो जाएगी।
  • करेंसी मजबूत करना: यह कदम मुद्रा की कीमत बढ़ाने की कोशिश है। जिससे, दूसरे देशों की करेंसी के मुकाबले रियाल की हालात सुधरेगी। हालांकि, इसका सीधा असर ट्रेड पर पड़ सकता है।

    रियाल में बदलाव से असर

    • लेन-देन को आसान बनाना: चार जीरो हटने से रियाल की इकाइयां छोटी हो जाएंगी। उदाहरण के लिए, अगर अभी कुछ खरीदने के लिए 10,00,000 रियाल चाहिए, तो सुधार के बाद वही चीज 100 रियाल में मिलेगी।
    • महंगाई पर कोई सीधा असर नहीं: यह सुधार केवल मुद्रा की इकाइयों को बदलता है, न कि उसका वास्तविक मूल्य। अगर महंगाई को नियंत्रित नहीं किया गया, तो रियाल का मूल्य कम होता रहेगा।
    • बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट में सुविधा: कंप्यूटर और मोबाइल ऐप में बड़ी संख्या के कारण होने वाली जटिलताएं कम होंगी।
    • मनोवैज्ञानिक प्रभाव: छोटी संख्याओं से लोगों को मुद्रा का मूल्य समझने में सुविधा होगी, जिससे उनकी खरीदारी और वित्तीय योजना में आसानी हो सकती है। हालांकि ये केवल साइकोलॉजिकल असर है।
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