पटना , 28 सितंबर 2026 । बिहार की राजधानी पटना में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को प्रदर्शन हुआ। भाकपा माले, AIYF, AISF, AISA समेत विभिन्न जनसंगठनों के कार्यकर्ताओं ने जन आक्रोश मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी राजभवन की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन जेपी गोलंबर के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्कामुक्की हुई।
पटना में उग्र प्रदर्शन
हजारों प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतांत्रिक अधिकारों से खिलवाड़ और मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। जेपी गोलंबर से शुरू हुआ यह मार्च लोकभवन और राजभवन का घेराव करने के उद्देश्य से आगे बढ़ा, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शनकारियों का मार्च जेपी गोलंबर तक पहुंचा था। यहां पुलिस ने रास्ता रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे। प्रदर्शनकारियों ने आगे जाने की कोशिश की और कुछ लोग बैरिकेडिंग पर चढ़ गए।
इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और डाकबंगला चौराहे की तरफ बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्कामुक्की हुई और कुछ समय के लिए मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।
CEC के इस्तीफे की मांग क्यों?
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। यह विरोध मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच हो रहा है।
प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों को स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता। चुनाव आयोग का कहना है कि उसके फैसले कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं और आयोग के सदस्यों के बीच टिप्पणियां एवं नोट आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा हैं।
पटना में यह पहला ऐसा प्रदर्शन नहीं है। 25 सितंबर को बिहार कांग्रेस ने भी CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च निकाला था। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव समेत पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए थे।
कांग्रेस कार्यकर्ता R-Block से राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए। प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने की कोशिश के बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्कामुक्की की भी रिपोर्ट सामने आई थी।
SIR बना राजनीतिक टकराव का केंद्र
SIR को लेकर बिहार समेत कई राज्यों में राजनीतिक बहस तेज हुई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को कानूनी आधार वाला और आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप बताया है।
यही मुद्दा अब सड़क पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों का भी प्रमुख केंद्र बन गया है। अलग-अलग विपक्षी दल और संगठन CEC के इस्तीफे तथा SIR से जुड़े फैसलों की समीक्षा की मांग उठा रहे हैं।
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध केवल पटना तक सीमित नहीं रहा है। हाल के दिनों में दिल्ली, चंडीगढ़, गुवाहाटी, देहरादून और अन्य शहरों में भी प्रदर्शन हुए हैं। कई जगह प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के कार्यालयों की ओर मार्च किया और पुलिस ने उन्हें बैरिकेड लगाकर रोकने की कोशिश की।
पटना में 25 सितंबर के कांग्रेस प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन के इस्तेमाल की घटना भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रही। 28 सितंबर के प्रदर्शन में बैरिकेड टूटने और पुलिस से धक्कामुक्की के बाद एक बार फिर राजधानी में चुनाव आयोग से जुड़े विवाद ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है।
आगे भी जारी रह सकता है विरोध
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद फिलहाल बने हुए हैं। पटना में हुए ताजा प्रदर्शन से संकेत मिलता है कि यह मुद्दा अब राजनीतिक सभाओं और बयानों से आगे बढ़कर सड़क पर विरोध का रूप ले चुका है।
आने वाले दिनों में प्रदर्शनकारी संगठनों की अगली रणनीति और चुनाव आयोग की ओर से आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी।