पटना, 28 सितंबर 2026 । बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 23 अक्टूबर को चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होना है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी की ओर से उम्मीदवारों के नामों की औपचारिक घोषणा में हो रही देरी चर्चा का विषय बनी हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी कई स्तरों पर नामों की समीक्षा के बाद अंतिम फैसला लेने की प्रक्रिया में है।
भाजपा शीर्ष नेतृत्व के सूत्रों की माने तो बीजेपी के रणनीतिकारों ने सब कुछ तय कर लिया है। सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी है। सूत्रों की माने तो पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नवल किशोर यादव, कोसी स्नातक से एनके यादव, दरभंगा स्नातक से सर्वेश कुमार और मुजफ्फरपुर शिक्षक क्षेत्र से नरेंद्र सिंह के नाम बस घोषणा हेतु इंतजाररत है। हालांकि, बिहार विधान परिषद के तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से गत चुनाव में भाकपा (CPI) समर्थित उम्मीदवार डॉ संजय सिंह ने जीत हासिल की थी। भाजपा के उम्मीदवार डॉ नरेंद्र प्रसाद सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे। एक चर्चा तो ये है कि बीजेपी ने डॉ नरेंद्र कुमार सिंह पर ही भरोसा किया है। लेकिन, इस क्षेत्र को लेकर बदलाव की भी उम्मीद जताई जा रही है।
भाजपा में उम्मीदवारों के नाम पर अभी सस्पेंस
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा के भीतर संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर प्रक्रिया काफी चरणों से गुजर रही है। रिपोर्ट में पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नवल किशोर यादव, कोसी स्नातक से एनके यादव, दरभंगा स्नातक से सर्वेश कुमार और मुजफ्फरपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नरेंद्र सिंह के नामों की चर्चा की गई है। हालांकि, इन नामों की अंतिम आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
भाजपा में उम्मीदवार चयन जिला और क्षेत्रीय स्तर से लेकर प्रदेश चुनाव समिति, राज्य कोर कमेटी और केंद्रीय स्तर तक की मंजूरी से गुजरता है। इसी वजह से संभावित नाम सामने आने के बावजूद आधिकारिक घोषणा में समय लग सकता है।
दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर भाजपा की रणनीति भी खास चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक सर्वेश कुमार पिछला चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत चुके हैं और बाद में भाजपा में शामिल हुए। ऐसे में पार्टी उन्हें अपने उम्मीदवार के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में बताई जा रही है।
इस तरह भाजपा की रणनीति में पुराने राजनीतिक समीकरणों के साथ ऐसे नेताओं को भी जगह देने की कोशिश दिखाई देती है, जिनका संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में पहले से राजनीतिक आधार रहा है।
क्या प्रशांत किशोर की वजह से बढ़ी सावधानी?
इस चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी सभी आठ सीटों पर उम्मीदवार उतार रही है। पार्टी ने तिरहुत शिक्षक सीट पर अपने उम्मीदवार में बदलाव भी किया है। पहले घोषित भुषण झा की जगह श्याम नंदन यादव को उम्मीदवार बनाया गया है। जन सुराज ने बताया कि उम्मीदवार चयन में फीडबैक को भी ध्यान में रखा गया।
ऐसे में भाजपा की ओर से उम्मीदवारों के नाम घोषित करने में हो रही देरी को राजनीतिक हलकों में प्रशांत किशोर के बढ़ते सक्रिय अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, यह कहना कि देरी सीधे तौर पर प्रशांत किशोर के प्रभाव की वजह से है, अभी आधिकारिक रूप से स्थापित नहीं है।
बांकीपुर के अनुभव का भी जिक्र
भाजपा की मौजूदा रणनीति की चर्चा में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का संदर्भ भी सामने आया है। जुलाई 2026 में भाजपा के पहले घोषित उम्मीदवार ने नामांकन के बाद पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए चुनाव लड़ने से पीछे हटने की घोषणा की थी। इसके बाद पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था। उस समय प्रशांत किशोर ने इस घटनाक्रम पर भाजपा पर राजनीतिक टिप्पणी की थी।
इसी पृष्ठभूमि में MLC चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन में पार्टी अधिक सावधानी बरत रही है, ऐसी राजनीतिक चर्चा सामने आई है। हालांकि भाजपा की ओर से यह नहीं कहा गया है कि उम्मीदवारों की घोषणा में देरी का एकमात्र कारण प्रशांत किशोर या जन सुराज है।
JDU ने घोषित कर दिए उम्मीदवार
NDA के भीतर भाजपा के मुकाबले JDU ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा पहले कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार पटना स्नातक से नीरज कुमार, तिरहुत स्नातक से अभिषेक कुमार झा, सारण शिक्षक से आनंद पुष्कर और दरभंगा शिक्षक से घनश्याम राय को उम्मीदवार बनाया गया है।
इससे भाजपा और JDU की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया के समय में अंतर भी साफ दिखाई देता है। भाजपा में जहां अंतिम घोषणा का इंतजार है, वहीं JDU अपने उम्मीदवारों के साथ चुनावी मैदान में उतर चुका है।
23 अक्टूबर को मतदान, 27 को आएगा परिणाम
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम भी सामने आ चुका है। 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी और नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 23 अक्टूबर को होगा और मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है।
चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों वाले इस चुनाव में भाजपा, JDU, विपक्षी दलों और जन सुराज के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा। खास तौर पर जन सुराज की सक्रियता के कारण उम्मीदवारों के चयन और स्थानीय समीकरणों पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।
फिलहाल भाजपा के संभावित उम्मीदवारों को लेकर कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन अंतिम तस्वीर पार्टी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। इसके बाद यह भी पता चलेगा कि भाजपा किन सीटों पर पुराने चेहरों पर भरोसा करती है और कहां नए या दूसरे दलों से आए नेताओं को मौका देती है।
बिहार MLC चुनाव में इस बार मुकाबला केवल दलों के बीच नहीं बल्कि अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के आधार पर भी देखा जा रहा है। ऐसे में उम्मीदवारों की अंतिम सूची सामने आने के बाद चुनावी रणनीति और गठबंधनों की वास्तविक तस्वीर और स्पष्ट होगी।