पटना, 28 सितंबर 2026 । बिहार में सरकारी ठेकों में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। निगरानी विभाग ने पांच करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले टेंडरों पर विशेष नजर डालने की प्रक्रिया शुरू की है। विभागों से टेंडर से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि निविदा जारी करने से लेकर काम आवंटित करने और भुगतान तक कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हो रही है जब बिहार में सरकारी ठेकों में कथित गड़बड़ी और ठेकेदारों-अधिकारियों के बीच सांठगांठ को लेकर जांच एजेंसियां पहले से सक्रिय हैं। रिशु श्री से जुड़े मामले में भी कई विभागों और उनकी कार्य एजेंसियों के अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आने की रिपोर्ट सामने आई है।
5 करोड़ से अधिक के टेंडरों की जांच
राज्य सरकार ने जिन नौ महत्वपूर्ण विभागों को जांच के दायरे में लिया है, उनमें स्वास्थ्य, नगर विकास, पथ निर्माण, पर्यटन और ग्रामीण कार्य विभाग शामिल हैं। इसके अलावा ऊर्जा विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED), भवन निर्माण विभाग और लघु जल संसाधन विभाग में जारी सभी बड़े टेंडरों का ब्योरा निगरानी विभाग को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
रिशु श्री मामले के बाद बढ़ी निगरानी
बिहार में सरकारी टेंडरों को लेकर रिशु श्री से जुड़ा मामला जांच का बड़ा केंद्र बना हुआ है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई में जल संसाधन, नगर विकास एवं आवास, भवन निर्माण और स्वास्थ्य से जुड़ी एजेंसियों के अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम सामने आने की रिपोर्ट है।
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय की जांच में मिले डिजिटल साक्ष्यों और बयानों के आधार पर कई तत्कालीन अधिकारियों से पूछताछ की संभावना बनी थी। मामले में सरकारी ठेकों के आवंटन और कथित तौर पर ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की जा रही है।
कई विभागों की परियोजनाओं पर नजर
सरकारी निर्माण और आधारभूत ढांचे से जुड़े विभागों में बड़ी संख्या में करोड़ों रुपये की परियोजनाएं संचालित होती हैं। इसलिए पांच करोड़ रुपये से अधिक के टेंडरों की जांच का दायरा काफी बड़ा हो सकता है।
भवन निर्माण, जल संसाधन, नगर विकास, स्वास्थ्य से जुड़ी एजेंसियों और अन्य अभियंत्रण विभागों की परियोजनाओं में टेंडर प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण होगी। रिशु श्री मामले में भी जल संसाधन विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, भवन निर्माण विभाग के साथ BUDCO और बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड का उल्लेख जांच के संदर्भ में किया गया है।
निगरानी विभाग की कार्रवाई के पीछे एक अहम चिंता ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच संभावित मिलीभगत की है। 2025 की रिपोर्ट में निगरानी विभाग को आशंका जताए जाने की बात सामने आई थी कि कुछ बड़ी परियोजनाओं में टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करके ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया जा सकता है।
हालांकि किसी भी अधिकारी या ठेकेदार के खिलाफ आरोप को अंतिम दोष साबित होने के तौर पर नहीं देखा जा सकता। जांच पूरी होने और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही जिम्मेदारी तय होगी।
अब रिपोर्ट से खुलेगा आगे का रास्ता
फिलहाल जांच का सबसे अहम चरण टेंडरों का डेटा जुटाने और उसकी तकनीकी तथा प्रशासनिक पड़ताल से जुड़ा है। यदि किसी परियोजना में नियमों से हटकर प्रक्रिया अपनाए जाने के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका पर आगे कार्रवाई हो सकती है।
बिहार में सरकारी टेंडरों की यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि करोड़ों रुपये की परियोजनाओं में पारदर्शी निविदा प्रक्रिया सीधे सरकारी धन और विकास कार्यों से जुड़ी होती है। आने वाले समय में जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकता है कि किन परियोजनाओं में वास्तविक अनियमितता मिली और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।