पटना , 25 सितंबर 2026 । चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने आयोग से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की बात कही है। 25 सितंबर को पटना में पत्रकारों से बातचीत में चिराग पासवान ने कहा कि आयोग को विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के बजाय जनता के मन में चुनावी प्रक्रिया को लेकर पैदा हो रहे संदेह को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए।
चुनाव आयोग अपनी बातों को मजबूती से रखना चाहिए
चिराग पासवान ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विपक्ष क्या बोलता है उससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि विपक्ष का काम राजनीति करना है। चुनाव आयोग पर जनता का विश्वास बना रहना जरूरी है, क्योंकि अगर चुनावी प्रक्रिया के ऊपर ही जनता का संदेह खड़ा हो जाएगा तो ये गलत है। ऐसे में चुनावआयोग अपनी बातों को मजबूती से रखना चाहिए। ताकि जनता के मन में कोई संदेह न आए।
चिराग पासवान के मुताबिक, यदि चुनाव आयोग के ऊपर सवाल उठ रहे हैं तो खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी बनती है कि वह आयोग का पक्ष मजबूती से जनता के सामने रखें। उन्होंने कहा कि विपक्ष क्या कहता है, इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि विपक्ष का काम राजनीतिक सवाल उठाना है।
उन्होंने जोर दिया कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और चुनावी प्रक्रिया को लेकर जनता के मन में किसी तरह का संदेह पैदा होना उचित नहीं है। इसलिए आयोग को तथ्यों के साथ अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
राहुल गांधी ने CEC के इस्तीफे की मांग की
चिराग पासवान का यह बयान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के एक दिन बाद आया है।
राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए CEC से इस्तीफा देने की मांग की। ये आरोप राहुल गांधी और कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति के रूप में सामने आए हैं, न कि स्थापित तथ्य के रूप में।
SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
विवाद की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े मुद्दे हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों के बीच कुछ निर्णयों को लेकर आपत्तियों का उल्लेख किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मतदाता सूची से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कई मौकों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इन मुद्दों में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने, चुनावी डेटा तक पहुंच और SIR से जुड़े विषय शामिल बताए गए।
विपक्ष और आयोग के बीच आमने-सामने की स्थिति
राहुल गांधी और विपक्षी दलों की ओर से आयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज करते हुए अपनी प्रक्रियाओं का बचाव किया है। इसी बीच NDA के सहयोगी दल के नेता के तौर पर चिराग पासवान का आयोग से सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष मजबूती से रखने का आग्रह इस बहस में एक अलग पहलू जोड़ता है।
हालांकि, चिराग पासवान ने चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए विपक्षी आरोपों को सही ठहराने के बजाय यह कहा कि आयोग को जनता के बीच किसी भी संभावित संदेह को दूर करने के लिए अपनी बात स्पष्ट रूप से रखनी चाहिए।
आगे आयोग की सफाई पर रहेगी नजर
चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद में अब आयोग की ओर से आने वाले स्पष्टीकरण और SIR से जुड़े फैसलों पर ध्यान रहेगा। फिलहाल चिराग पासवान ने भी इसी बात पर जोर दिया है कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बना रहना जरूरी है।
इस पूरे मामले में राहुल गांधी के आरोप, चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों की रिपोर्ट और चुनाव आयोग की ओर से दी गई सफाई—तीनों को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है। अंतिम कानूनी या संस्थागत निष्कर्ष संबंधित आधिकारिक प्रक्रियाओं और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही तय होंगे।