पंजाब , 12 सितंबर 2026। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर सियासी खींचतान तेज होती नजर आ रही है। कांग्रेस के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने साफ कर दिया है कि चुनाव से पहले पार्टी किसी एक नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं करेगी। उनके इस बयान से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों को बड़ा झटका माना जा रहा है, जो चन्नी को दोबारा मुख्यमंत्री पद का दावेदार मानकर चल रहे थे।
जयपुर में पंजाब कांग्रेस के नेताओं के साथ चर्चा के दौरान सचिन पायलट ने कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस विपक्ष में होती है, वहां पार्टी किसी एक नेता को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करके चुनाव नहीं लड़ती। सभी नेता और कार्यकर्ता मिलकर चुनाव मैदान में उतरते हैं और बहुमत मिलने के बाद मुख्यमंत्री का फैसला किया जाता है।
पायलट के इस रुख को चरणजीत सिंह चन्नी गुट के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है। दरअसल, चन्नी खेमे की ओर से लंबे समय से पंजाब कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व में बदलाव की मांग उठती रही है। साथ ही चरणजीत सिंह चन्नी को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने की पैरवी भी की जाती रही है। हालांकि नेताओं ने कई बार यह मांग सीधे तौर पर सार्वजनिक नहीं की, लेकिन अंदरूनी बैठकों में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर दबाव बनाए जाने की चर्चा रही है।
चन्नी और राजा वड़िंग के बीच भी दिखी दूरी
पंजाब कांग्रेस में मुख्यमंत्री चेहरे के साथ-साथ संगठन के भीतर गुटबाजी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के कार्यक्रमों में तालमेल की कमी दिखाई दी है। दोनों नेताओं के अलग-अलग राजनीतिक कार्यक्रमों ने पार्टी के अंदर मतभेदों की अटकलों को और हवा दी है।
पायलट के सामने बड़ी चुनौती
सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस में गुटीय राजनीति को नियंत्रित करने और पार्टी नेताओं को एक मंच पर लाने की चुनौती मिली है। कांग्रेस नेतृत्व उन्हें चुनावी तैयारियों में सक्रिय कर चुका है। ऐसे में पायलट का यह बयान पार्टी के भीतर सभी नेताओं को यह संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है कि चुनाव से पहले व्यक्तिगत दावेदारी के बजाय संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाए।
कांग्रेस के सामने एकजुटता की चुनौती
पंजाब में आम आदमी पार्टी, भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के बीच कांग्रेस को अपनी स्थिति मजबूत करनी है। ऐसे में पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर विवाद चुनावी अभियान को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल किसी एक नेता को आगे करने के बजाय सामूहिक चुनावी रणनीति पर जोर दे रहा है।
चुनाव के बाद तय होगा मुख्यमंत्री का चेहरा?
पायलट के बयान के बाद यह सवाल भी अहम हो गया है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा। फिलहाल पार्टी ने इस पर कोई अंतिम चेहरा घोषित नहीं किया है। ऐसे में चरणजीत सिंह चन्नी, राजा वड़िंग और कांग्रेस के अन्य प्रमुख नेताओं की भूमिका चुनाव परिणाम के बाद तय होने की संभावना है।
कुल मिलाकर, पंजाब कांग्रेस में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है। सचिन पायलट का संदेश स्पष्ट है कि पार्टी चुनाव से पहले किसी एक नेता को CM फेस घोषित करने के मूड में नहीं है। ऐसे में अब कांग्रेस के भीतर चन्नी गुट की अगली रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।