पटना, 12 सितंबर 2026। बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तीन अहम सीटों पर ऐसे चेहरों को मैदान में उतारने की तैयारी की है, जिन्हें ‘उधार के खिलाड़ी’ कहा जा रहा है। इनमें पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। पार्टी का मकसद इन सीटों पर मजबूत स्थानीय पकड़ और व्यक्तिगत प्रभाव वाले उम्मीदवारों के जरिए मुकाबले को अपने पक्ष में करना है।
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
राष्ट्रीय जनता दल नेतृत्व ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जदयू के पुराने मोहरे से ही भाजपा के वर्तमान MLC नवल किशोर यादव को हराने की रणनीति तैयार की है। भाजपा के टिकट पर 5 बार चुनावी जंग जीत चुके नवल किशोर यादव को हराने के लिए डॉ संजीव कुमार को पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के जंग में उतारा है। पेशे से ये चिकित्सक रहे हैं और ये नामचीन पिता के पुत्र हैं जिनका नाम स्व. रामानंद प्रसाद सिंह (आर. एन. सिंह) था, जो बिहार सरकार में पूर्व मंत्री और 5 बार परबत्ता से विधायक रहे। वहीं जनसुराज की दिव्य ज्योति के लड़ाई में कूदते ही संघर्ष त्रिकोणात्मक हो गया है।
उधार के खिलाड़ी’ क्यों अहम?
राजनीति में किसी दूसरे दल से आए या दूसरे राजनीतिक खेमे में सक्रिय रहे प्रभावशाली चेहरे को चुनावी मैदान में उतारना नया प्रयोग नहीं है। हालांकि, बिहार में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की राजनीति में उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि, मतदाताओं से संपर्क और स्थानीय नेटवर्क काफी मायने रखता है।
यही वजह है कि आरजेडी ने इन सीटों पर केवल पारंपरिक पार्टी कार्यकर्ताओं पर निर्भर रहने के बजाय ऐसे चेहरों को मौका देने की रणनीति बनाई है, जो अपने-अपने वर्ग में प्रभाव रखते हैं।
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षकों के बीच उम्मीदवार की व्यक्तिगत स्वीकार्यता और लंबे समय से किए गए सामाजिक-राजनीतिक काम का असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है। आरजेडी की रणनीति यहां संगठन के साथ उम्मीदवार के निजी नेटवर्क को जोड़ने की है।
पार्टी के सामने चुनौती यह होगी कि उम्मीदवार के पुराने राजनीतिक संबंधों और आरजेडी की मौजूदा विचारधारा के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए।
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र भी आरजेडी की रणनीति में महत्वपूर्ण है। स्नातक मतदाताओं के बीच बेरोजगारी, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं।
तेजस्वी यादव की टीम इस चुनाव में इन मुद्दों को स्थानीय उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहुंच के साथ जोड़ने की कोशिश कर सकती है। इससे आरजेडी को व्यापक मतदाता समूह तक पहुंच बनाने का मौका मिलेगा।
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी आरजेडी ने मुकाबले को गंभीरता से लिया है। सारण क्षेत्र लंबे समय से बिहार की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां शिक्षक मतदाताओं के बीच मजबूत उम्मीदवार खड़ा करना आरजेडी की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
विधानसभा चुनाव से पहले क्यों महत्वपूर्ण है MLC चुनाव?
विधान परिषद की इन सीटों का चुनाव केवल तीन सीटों तक सीमित राजनीतिक मुकाबला नहीं माना जा रहा। बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच हर चुनाव राजनीतिक दलों के संगठन और जमीनी नेटवर्क की परीक्षा भी बन जाता है।
आरजेडी के लिए यह चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी इन परिणामों के जरिए शिक्षक, स्नातक और शहरी शिक्षित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ का आकलन कर सकती है। वहीं, विपक्षी दल भी इन सीटों पर आरजेडी की रणनीति को चुनौती देने की तैयारी में हैं।
तेजस्वी के प्रयोग का क्या होगा असर?
तेजस्वी यादव का ‘उधार के खिलाड़ियों’ पर दांव कितना सफल रहता है, इसका फैसला चुनाव परिणाम करेगा। अगर ये उम्मीदवार जीत हासिल करते हैं तो आरजेडी की यह रणनीति पार्टी के लिए आगे भी नए राजनीतिक चेहरों को साथ लाने का रास्ता खोल सकती है। वहीं, अगर पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिलती है तो उम्मीदवार चयन और स्थानीय संगठन की भूमिका पर सवाल उठ सकते हैं।
फिलहाल तीनों सीटों पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है और सभी की नजर इस बात पर है कि तेजस्वी यादव की यह रणनीति आरजेडी को विधान परिषद में कितना फायदा दिला पाती है।