‘धुरंधर’ की तारीफ के बीच तिग्मांशु धूलिया का बड़ा सवाल

अंडरकवर स्पाई पाकिस्तान जाए और तबाही मचा दे, क्या यही कहानी है?

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नई दिल्ली, 08 सितंबर2026 । फिल्ममेकर और अभिनेता तिग्मांशु धूलिया ने रणवीर सिंह स्टारर ‘धुरंधर’ की कहानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि उन्होंने फिल्म के पहले पार्ट की प्रस्तुति, एंगेजिंग अंदाज और म्यूजिक की तारीफ भी की। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सिनेमा में बदलते कहानी कहने के तरीकों पर चर्चा करते हुए उन्होंने ‘धुरंधर’ को मौजूदा कमर्शियल फिल्मों के टेंपलेट का उदाहरण बताया।

धूलिया ने कमर्शियल मेनस्ट्रीम सिनेमा का उदाहरण देते हुए ‘पुष्पा’, ‘केजीएफ’ और ‘धुरंधर’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “हर फिल्म एक फिक्शनल बायोपिक है।” ‘धुरंधर’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर किसी से फिल्म की कहानी पूछी जाए तो शायद वह उसे ठीक से बता नहीं पाएगा।

उन्होंने कहा, “मैंने वह फिल्म देखी है। मुझे फिल्म का पहला पार्ट काफी पसंद आया। बहुत अच्छी तरह प्रेजेंट किया गया है, काफी एंगेजिंग है और म्यूजिक भी अच्छा है, लेकिन आप उसकी कहानी पूछिएगा तो आप कहानी बता नहीं पाएंगे।”

धूलिया ने फिल्म की कहानी को अपने अंदाज में समझाते हुए कहा, “एक आदमी है, अंडरकवर स्पाई है, पाकिस्तान जाता है और वहां तबाही मचा देता है। ये कोई कहानी हुई?”

‘धुरंधर’ की कहानी पर क्या बोले तिग्मांशु?

तिग्मांशु धूलिया के मुताबिक अगर किसी दर्शक से ‘धुरंधर’ की कहानी बताने के लिए कहा जाए तो शायद वह उसे आसानी से शब्दों में नहीं बता पाएगा। उन्होंने अपने अंदाज में फिल्म की कहानी को एक अंडरकवर व्यक्ति के पाकिस्तान जाने और वहां तबाही मचाने के रूप में समझाया और सवाल किया कि क्या इसे पूरी तरह कहानी कहा जा सकता है।

हालांकि तिग्मांशु ने फिल्म को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा कि उन्हें ‘धुरंधर’ का पहला पार्ट पसंद आया और इसकी प्रस्तुति काफी अच्छी लगी। उनके मुताबिक फिल्म एंगेजिंग थी और म्यूजिक का इस्तेमाल भी प्रभावी तरीके से किया गया था। यानी उनकी आपत्ति फिल्म के ट्रीटमेंट से ज्यादा उसकी कहानी और नैरेटिव की गहराई को लेकर थी।

बॉलीवुड के बदलते सिनेमा पर भी निशाना

तिग्मांशु धूलिया ने अपनी टिप्पणी को सिर्फ ‘धुरंधर’ तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने मौजूदा हिंदी सिनेमा में कॉरपोरेट कल्चर और कमर्शियल दबाव के बढ़ते प्रभाव पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि आज एक जैसे टेंपलेट पर फिल्में बनने लगी हैं और मौलिक कहानियों के लिए जगह कम होती जा रही है।

उन्होंने ‘पुष्पा’, ‘केजीएफ’ और ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा कि मौजूदा दौर में कई फिल्में उन्हें एक तरह की ‘फिक्शनल बायोपिक’ जैसी लगती हैं। उनके अनुसार जिन फिल्मकारों के पास अलग तरह की कहानियां हैं, उन्हें भी कई बार यह सोचकर मौका नहीं मिलता कि ऐसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर शायद सफल नहीं होंगी।

बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस

तिग्मांशु धूलिया का यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर ‘धुरंधर’ को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। फिल्म के प्रशंसक जहां इसकी कहानी और मेकिंग का बचाव कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग तिग्मांशु की बात को फिल्म की कहानी पर गंभीर फिल्मी आलोचना के तौर पर देख रहे हैं।

खास बात यह है कि तिग्मांशु ने फिल्म के प्रस्तुतीकरण की तारीफ भी की है। इसलिए उनकी टिप्पणी को सीधे तौर पर पूरी फिल्म को नकारने के बजाय कहानी कहने के तरीके और मौलिकता पर उनकी आपत्ति के रूप में देखा जा सकता है।

‘धुरंधर’ की सफलता के बीच उठे सवाल

रणवीर सिंह की अगुवाई वाली ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी इस साल की चर्चित फिल्मों में शामिल रही है। ऐसे में तिग्मांशु धूलिया जैसे अनुभवी फिल्ममेकर की कहानी को लेकर की गई टिप्पणी ने फिल्म की सफलता के साथ-साथ उसके कंटेंट पर भी चर्चा शुरू कर दी है।

तिग्मांशु धूलिया खुद ‘हासिल’ और ‘पान सिंह तोमर’ जैसी फिल्मों के लिए पहचाने जाते हैं और कहानी-केंद्रित सिनेमा से उनका जुड़ाव रहा है। उनकी आगामी फिल्म ‘घमासान’ में प्रतीक गांधी और अरशद वारसी नजर आएंगे, जो ZEE5 पर रिलीज होने वाली है।

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