गाजियाबाद में एयरोसिटी टाउनशिप को लेकर फिर होगा सर्वे, मोरटी-अटौर की जमीन पर आपत्तियों से बढ़ी चुनौती
गाजियाबाद , 14 अगस्त 2026 । गाजियाबाद में प्रस्तावित एयरोसिटी टाउनशिप की जमीन को लेकर सामने आई आपत्तियों के बाद गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) एक बार फिर विस्तृत सर्वे कराएगा। मोरटी, अटौर और आसपास के गांवों के लोगों की ओर से जमीन पर आबादी होने का दावा किए जाने के बाद प्राधिकरण को अपने शुरुआती सर्वे की दोबारा जांच करनी पड़ रही है। नए सर्वे के बाद ही योजना की जमीन और आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
100 से अधिक लोगों ने दर्ज कराई थी आपत्ति
एयरोसिटी टाउनशिप के पहले चरण के लिए 200 हेक्टेयर से अधिक जमीन प्रस्तावित है। इसके लिए पहले हुए सर्वे के रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए थे। उस समय राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित जमीन खाली दर्ज थी। नोटिस जारी होने के बाद मोरटी, अटौर और नंगला गांव के 100 से अधिक लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई।
200 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में प्रस्तावित है एयरोसिटी
गाजियाबाद की एयरोसिटी योजना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के आसपास 200 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में प्रस्तावित है। योजना का उद्देश्य क्षेत्र में आधुनिक शहरी सुविधाओं और सुनियोजित विकास को बढ़ावा देना है।
लेकिन जमीन से जुड़ी आपत्तियों और मौजूदा आबादी के कारण परियोजना की रफ्तार प्रभावित हुई है। दोबारा सर्वे पूरा होने के बाद ही जमीन की वास्तविक स्थिति के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
लैंड पूलिंग की प्रक्रिया पर भी पड़ेगा असर
GDA एयरोसिटी और हरनंदीपुरम फेज-1 जैसी योजनाओं के लिए लैंड पूलिंग के जरिए जमीन जुटाने की तैयारी कर रहा था। किसानों और जमीन मालिकों को योजना की जानकारी देने की प्रक्रिया भी प्रस्तावित थी।
हालांकि एयरोसिटी के नए सर्वे के कारण पूरी प्रक्रिया में कुछ देरी होने की संभावना है। प्राधिकरण के लिए पहले जमीन की स्थिति और आपत्तियों का समाधान करना जरूरी होगा।
सर्वे के बाद तय होगा आगे का रास्ता
अब GDA की नजर दोबारा होने वाले सर्वे पर है। सर्वे में यह स्पष्ट किया जाएगा कि योजना क्षेत्र में कितनी जमीन वास्तव में खाली है, कितने मकान और आबादी मौजूद हैं और किन हिस्सों को योजना में शामिल किया जा सकता है।
इसके बाद ही संशोधित योजना, जमीन अधिग्रहण या लैंड पूलिंग से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होगा। एयरोसिटी परियोजना के लिए यह सर्वे इसलिए अहम है क्योंकि जमीन से जुड़ी आपत्तियों का समाधान किए बिना योजना को जमीन पर उतारना मुश्किल होगा।