मेरठ में 16,726 मकानों पर कार्रवाई का खतरा

उल्देपुर की 100 से ज्यादा कॉलोनियों पर भी चलेगा अभियान

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मेरठ, 29  सितंबर 2026 । मेरठ में अवैध और अनधिकृत निर्माणों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण यानी मेडा की कार्रवाई की तैयारी तेज हो गई है। जोन-ए में चिन्हित 16,726 भवनों को लेकर दोबारा सर्वे की तैयारी है, जबकि उल्देपुर क्षेत्र में 100 से अधिक अवैध कॉलोनियों और निर्माणों पर कार्रवाई के लिए भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) में हलचल तेज हो गई है। किठौर विधानसभा क्षेत्र के अंतिम छोर पर बसे उल्देपुर में 100 से अधिक अवैध कॉलोनियों और निर्माणों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही शहर के जोन-ए में चिह्नित 16726 भवनों का दोबारा सर्वे कराने की तैयारी है।

मेडा की ओर से जोन-ए में 16,726 निर्माण चिह्नित किए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक इनमें 12,907 आवासीय, 874 आवासीय-सह-गैर-आवासीय और 2,945 गैर-आवासीय निर्माण शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इन निर्माणों को लेकर सीलिंग और आगे की कार्रवाई का मुद्दा सामने आया है।

हालांकि, मेडा अब री-सर्वे के जरिए यह स्पष्ट करेगा कि इनमें से कौन से निर्माण प्राधिकरण की स्थापना से पहले के हैं और कौन बाद में हुए। अधिकारियों के अनुसार रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान किया जाएगा। इसलिए 16,726 भवनों की संख्या को सीधे इतने मकानों के तत्काल ध्वस्तीकरण के बराबर नहीं माना जा सकता।

उल्देपुर की 100 से ज्यादा कॉलोनियां भी जांच के घेरे में

किठौर क्षेत्र के उल्देपुर और आसपास अवैध कॉलोनियों के विकास को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता दिखाई है। रिपोर्टों के अनुसार यहां 100 से अधिक कॉलोनियों और निर्माणों पर कार्रवाई की तैयारी है। मेडा को इन क्षेत्रों में रिकॉर्ड की जांच और आदेश के दायरे में आने वाले निर्माणों पर नियमानुसार कार्रवाई करनी है।

उल्देपुर की जमीन और वहां विकसित कॉलोनियों की स्थिति की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित करने का आदेश दिया है। आयोग यह देखेगा कि जमीन सरकारी है या निजी और निजी जमीन होने की स्थिति में जमीन मालिकों तथा खरीदारों के बीच लेनदेन किस तरह हुआ। मेडा की भूमिका से जुड़े सवालों की भी जांच की जानी है।

पुराने मकानों के मालिकों की बढ़ी चिंता

16,726 भवनों की सूची सामने आने के बाद कई भवन स्वामी अपने निर्माण की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ लोगों का कहना है कि उनके मकान कई दशक पुराने हैं। इसी वजह से री-सर्वे में निर्माण की उम्र और उपलब्ध रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।

भवन स्वामियों से पुराने बैनामे, हाउस टैक्स रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। इन दस्तावेजों को मौके की स्थिति के साथ मिलाकर यह निर्धारित करने की कोशिश होगी कि संबंधित निर्माण किस अवधि में हुआ था।

जोन-B, C और D का भी होगा सर्वे

अभी 16,726 निर्माणों का आंकड़ा जोन-ए से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट ने आगे जोन-B, C और D की स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। इससे मेरठ में अनधिकृत निर्माणों की वास्तविक संख्या को लेकर तस्वीर आगे और स्पष्ट हो सकती है। अगली सुनवाई में इन जोन की रिपोर्ट पेश की जानी है।

मेडा के सामने अब दो स्तर की प्रक्रिया है। एक ओर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करनी है, वहीं दूसरी ओर पुराने निर्माणों की स्थिति को रिकॉर्ड और री-सर्वे के जरिए स्पष्ट करना है। उल्देपुर में भी कार्रवाई से पहले जमीन, कॉलोनियों और निर्माणों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक पहले भी उल्देपुर में कार्रवाई के लिए मेडा की टीम पहुंची थी, लेकिन पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने के कारण अभियान आगे नहीं बढ़ सका।

अगली सुनवाई 9 दिसंबर को

मेरठ के अवैध निर्माण और उल्देपुर की कॉलोनियों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को निर्धारित है। तब तक संबंधित अधिकारियों को आगे की कार्रवाई और जोन-B, C तथा D की स्थिति से जुड़ी रिपोर्ट पेश करनी है।

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