लखनऊ में 2000 करोड़ की जमीन पर कब्जे का आरोप

कौन है सिकंदर खान? दो वोटर आईडी और शपथपत्र से बढ़ा राज

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लखनऊ , 14 अगस्त 2026 । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में करीब 2,000 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर कथित कब्जे के मामले ने प्रशासन और पुलिस की जांच को तेज कर दिया है। इस मामले में सिकंदर खान नाम सामने आया है। जांच के दौरान उसके नाम से दो अलग-अलग वोटर आईडी और एक शपथपत्र मिलने की बात सामने आई है। इन दस्तावेजों में अलग-अलग पते दर्ज होने और हस्ताक्षरों में कथित अंतर ने उसकी पहचान को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकीपुरम, चिनहट और बीकेटी इलाके में फर्जी चकबंदी आदेश से करीब 120 बीघा सरकारी जमीन हड़पने की कोशिश की गई है। कोर्ट में मामला पकड़ में आया तो जानकीपुरम थाने में 4 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई। इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड सिकंदर खान नाम का शख्स बताया जा रहा है। चकबंदी विभाग के सात अफसर भी जांच के घेरे में हैं और सिकंदर से उनकी नजदीकियों की आशंका है। सिकंदर कोर्ट में दस्तावेजों में तो पकड़ में आ गया, लेकिन असल में पुलिस-प्रशासन के अधिकारी उसके बारे में कोई खास जानकारी नहीं जुटा पा रहे हैं।

फर्जी चकबंदी आदेश की भी जांच

इस पूरे मामले में कथित फर्जी चकबंदी आदेश जांच का अहम हिस्सा हैं। अधिकारियों को यह पता लगाना है कि जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत किया गया।

चकबंदी विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आने से मामला और गंभीर हो गया है। प्रशासन का कहना है कि रिकॉर्ड जुटाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अब जांच से खुलेगा पूरा नेटवर्क

सिकंदर खान से जुड़े दो पहचान पत्र, अलग-अलग पते और अदालत में दाखिल शपथपत्र ने मामले को और पेचीदा बना दिया है। अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी वास्तविक पहचान, जमीन के दस्तावेजों की सत्यता और कथित कब्जे के पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क का पता लगाना है।

फिलहाल 2,000 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन से जुड़े इस मामले में जांच जारी है और आगे की कार्रवाई दस्तावेजों तथा एफआईआर में सामने आए तथ्यों के आधार पर तय होगी।

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