पहली कमाई खुद पर खर्च करने के बजाय बाढ़ पीड़ितों को दी, तेजस्वी यादव के फैसले की हो रही चर्चा

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पटना, 12 अगस्त 2026 । आरजेडी नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की पहली सैलरी से जुड़ी एक पुरानी घटना एक बार फिर चर्चा में है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, जब तेजस्वी यादव को उनकी पहली सैलरी मिली तो उन्होंने उस रकम को अपने ऊपर खर्च करने के बजाय जरूरतमंदों की मदद के लिए दान कर दिया था। उनकी पहली सैलरी तमिलनाडु में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए दी गई थी।

तेजस्वी के इस फैसले को उनकी सार्वजनिक छवि और सामाजिक सरोकार से जोड़कर देखा जा रहा है। पहली कमाई मिलने के बाद आमतौर पर लोग उसे अपनी जरूरतों, शौक या परिवार पर खर्च करते हैं, लेकिन तेजस्वी ने पूरी सैलरी आपदा प्रभावित लोगों की मदद के लिए देने का फैसला किया।

पहली सैलरी तमिलनाडु बाढ़ पीड़ितों के लिए दान

तेजस्वी यादव नवम्बर 2015 में पहली बार विधायक बने थे। फिर बिहार के उपमुख्यमंत्री और तीन अन्य विभागों के मंत्री बने। दिसम्बर में पहली सैलरी मिली थी। उस समय तमिलनाडु में भयंकर बाढ़ आयी हुई थी। हजारों लोग बेघर हो गये थे। उनका खाना पीनी भी दूभर हो गया था। तब तेजस्वी यादव ने अपनी पहली सैलरी तमिलनाडु के बाढ़ पीड़ितों को दान कर दी। उस समय तेजस्वी यादव की सैलरी 1 लाख 25 हजार से 1 लाख 50 हजार रुपये के बीच रही होगी। उन्होंने यह सेलरी अपने हाथ में ली भी नहीं थी। यह पैसा उन्होंने अपने सैलरी अकाउंट से सीधे तमिलनाडु बाढ़ राहत कोष में ट्रांसफर कर दिया। उस समय उनके इस कदम बहुत सराहना भी हुई थी। तब लालू यादव ने कहा था, ‘लड़का(तेजस्वी) राजनीति में नया है लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा है।’

कोरोना काल में भी दान की थी सैलरी

तेजस्वी यादव के वेतन से जुड़ी यह पहली ऐसी घटना नहीं बताई जाती। कोरोना महामारी के दौरान भी उन्होंने अपनी सैलरी दान करने की बात सामने आई थी। इससे उनके समर्थक इसे जरूरतमंदों की सहायता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के उदाहरण के तौर पर देखते हैं।

हालांकि, तेजस्वी यादव की आर्थिक स्थिति को लेकर हाल के दिनों में एक अलग बयान भी चर्चा में रहा है। अगस्त 2026 में उन्होंने दावा किया कि उन्हें पिछले पांच-छह महीनों से वेतन नहीं मिला है और इसे लेकर उन्होंने बिहार सरकार की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाए।

‘कुछ महीने वेतन न मिले तो भी फर्क नहीं’

तेजस्वी यादव ने यह भी कहा है कि अगर उन्हें कुछ महीनों तक वेतन नहीं मिले तो इससे उन पर खास असर नहीं पड़ेगा। इसी बयान के संदर्भ में उनकी पहली सैलरी दान करने की घटना को फिर से चर्चा में लाया जा रहा है।

पहली सैलरी से जुड़ी यह कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें कमाई को व्यक्तिगत खर्च के बजाय आपदा राहत में लगाने का फैसला सामने आता है। हालांकि, यह घटना किस वर्ष और कितनी सटीक राशि से जुड़ी थी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है।

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