EOU की रेड में DPO अजीत की संपत्ति का खुलासा, 41 लाख की जमीन ही खरीदी

वेतन से ज्यादा निकली मकान की कीमत

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पटना/सहरसा, 08 अगस्त 2026 । बिहार में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई के बाद जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) अजीत की कथित आय से अधिक संपत्ति को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी की छापेमारी में ऐसी संपत्तियों और निवेश का पता चलने का दावा किया गया है, जिनकी कीमत उनकी अब तक की सेवा अवधि में प्राप्त वेतन से अधिक बताई जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ जमीन खरीदने में करीब 41 लाख रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है।

ईओयू की उम्मीद से ज्यादा निकली अजीत अमर की संपत्ति

बिहार पुलिस मुख्यालय के अनुसार, विश्वसनीय स्रोतों से मिली जानकारी के सत्यापन के बाद ईओयू ने अजीत अमर के खिलाफ केस नंबर 17/26 दर्ज किया। यह मामला 6 अगस्त को दर्ज किया गया है। ईओयू की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि अजीत अमर ने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कथित तौर पर 62.20 लाख रुपये की अधिक संपत्ति अर्जित की है। एजेंसी के मुताबिक, यह कथित आय से अधिक संपत्ति उनकी वैध आय से करीब 72.35 प्रतिशत अधिक है।

मकान की कीमत वेतन से भी ज्यादा होने का दावा

EOU की जांच में DPO अजीत के नाम या उनसे जुड़े ठिकानों पर मौजूद संपत्तियों का ब्योरा खंगाला गया। जांच के दौरान सामने आई जानकारी के मुताबिक, एक मकान की अनुमानित कीमत इतनी बताई जा रही है कि वह अधिकारी को अब तक मिले कुल वेतन से भी अधिक है।

इस तरह की संपत्ति सामने आने के बाद जांच एजेंसी की नजर अब आय के ज्ञात स्रोतों और संपत्तियों के बीच अंतर पर है। अधिकारियों की ओर से दस्तावेजों, बैंक खातों और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

41 लाख रुपये की जमीन ने बढ़ाया शक

जांच के दौरान करीब 41 लाख रुपये की जमीन की खरीद का भी पता चलने की बात सामने आई है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन खरीदने के लिए रकम कहां से आई और क्या संपत्ति खरीद के दौरान सभी वित्तीय नियमों का पालन किया गया था।

जमीन के दस्तावेजों, भुगतान के तरीके और संबंधित बैंक खातों की जांच के जरिए कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

EOU ने खंगाले दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड

आर्थिक अपराध इकाई की छापेमारी के दौरान संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच की गई। ऐसे मामलों में एजेंसी आमतौर पर आरोपी अधिकारी की घोषित आय, वेतन, बैंक खातों, निवेश और संपत्तियों का मिलान करती है।

यदि जांच में ज्ञात आय के मुकाबले संपत्ति का मूल्य काफी अधिक पाया जाता है, तो अधिकारी से इन संपत्तियों के स्रोत और खरीद के लिए इस्तेमाल की गई रकम का हिसाब मांगा जा सकता है।

‘धनकुबेर’ वाली तस्वीर की जांच में होगी पुष्टि

छापेमारी के बाद सामने आए संपत्ति के ब्योरे ने DPO अजीत को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, जांच पूरी होने और आधिकारिक तौर पर संपत्ति तथा आय का विस्तृत मिलान होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में कितनी संपत्ति आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक है।

जांच एजेंसी अब संपत्तियों के बाजार मूल्य, खरीद मूल्य और अधिकारी की वैध आय का तुलनात्मक आकलन कर सकती है। इसके बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होगी।

आय से अधिक संपत्ति मामलों में क्या होता है?

आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसी सबसे पहले आरोपी की वैध आय और उसके खर्च व संपत्तियों का आकलन करती है। इसमें वेतन के अलावा वैध निवेश, पैतृक संपत्ति, ऋण या अन्य घोषित स्रोतों को भी देखा जा सकता है।

इसलिए केवल किसी संपत्ति की मौजूदगी अपने आप में अपराध साबित नहीं करती। जांच में यह स्थापित करना जरूरी होता है कि संपत्ति या खर्च का स्रोत क्या था और क्या वह अधिकारी की वैध आय से मेल खाता है।

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