आज से RBI की तीन दिवसीय MPC बैठक शुरू, ब्याज दरों और महंगाई पर रहेगा पूरा फोकस

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नई दिल्ली, 03 अगस्त 2026 । भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो रही है। इस बैठक में रेपो रेट, महंगाई, आर्थिक विकास, तरलता प्रबंधन और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उद्योग जगत, निवेशकों, बैंकों, गृह ऋण लेने वालों और आम लोगों की नजर इस बैठक के फैसलों पर टिकी हुई है।

RBI की पिछली मीटिंग जून में हुई थी

रिजर्व बैंक ने नए वित्त वर्ष की दूसरी मीटिंग जून में की थी। इसमें रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा था। हालांकि 2027 में महंगाई के अनुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया था। इस वित्तीय वर्ष में कुल 6 बैठकें होनी हैं, ये इस वित्त वर्ष की तीसरी मीटिंग है। पहली बैठक अप्रैल में हुई थी।

रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है?

रेपो रेट महंगाई से लड़ने का टूल है। जब महंगाई ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक इसे बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होने पर डिमांड घटती है और महंगाई कम हो जाती है।

जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है, तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।

MPC बैठक के दौरान समिति देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति, खुदरा महंगाई (CPI), औद्योगिक उत्पादन, उपभोक्ता मांग और वैश्विक बाजारों की स्थिति का आकलन करेगी। इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि रेपो रेट में कोई बदलाव किया जाए या उसे मौजूदा स्तर पर बरकरार रखा जाए। रेपो रेट में बदलाव का सीधा असर होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन और बैंक जमा पर मिलने वाले ब्याज पर पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई के रुझान, मानसून, खाद्य कीमतों और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें इस बार की बैठक में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इसके अलावा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और वित्तीय बाजारों के हालात को भी ध्यान में रखा जाएगा, ताकि विकास और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

तीन दिन तक चलने वाली इस बैठक के बाद RBI गवर्नर मौद्रिक नीति के फैसलों की घोषणा करेंगे। इसके साथ ही आर्थिक वृद्धि दर, महंगाई के अनुमान और भविष्य की नीति संबंधी दिशा (Policy Stance) पर भी जानकारी दी जाएगी। निवेशकों, उद्योग जगत और आम उपभोक्ताओं को इस घोषणा का इंतजार रहेगा, क्योंकि इससे आने वाले महीनों में ब्याज दरों और वित्तीय बाजारों की दिशा तय हो सकती है।

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