SC आरक्षण पर हाई कोर्ट की रोक के बाद मायावती की सलाह

स्पेशल कम्पोनेंट प्लान’ मामले में सुप्रीम कोर्ट जाए यूपी सरकार

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लखनऊ , 18 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्पेशल कम्पोनेंट प्लान (SCP) के तहत लागू अतिरिक्त आरक्षण व्यवस्था पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की रोक के बाद बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग की है। मायावती ने कहा कि यूपी सरकार को हाई कोर्ट में इस व्यवस्था के पक्ष में मजबूती से पैरवी करनी चाहिए थी और अब रोक के बाद सुप्रीम कोर्ट से राहत मांगनी चाहिए।

सरकार ने नहीं की पुरजोर पैरवी

बसपा प्रमुख मायावती ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है कि, बहुचर्चित सामाजिक न्याय की जरूरत व मांग यही है कि यूपी सरकार माननीय न्यायालय में इस बात की पुरजोर पैरवी करती कि एससी समाज के हित व कल्याण के लिए ’स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान’ के धन से जिला सहारनपुर, अम्बेडकरनगर, कन्नौज व जालौन में मेडिकल कालेज बनाए गए हैं। इनमें एससी वर्ग के लिए अतिरिक्त आरक्षण की व्यवस्था 50 प्रतिशत के सामान्य आरक्षण से अलग है। इस व्यवस्था से स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान की भरपूर उपयोगिता साबित होती है। यदि यूपी सरकार इसकी मजबूत पैरवी करती तो शायद माननीय कोर्ट इस पर जरूर सकारात्मक विचार करता और इस पर रोक नहीं लगाता।

चार मेडिकल कॉलेजों की आरक्षण व्यवस्था पर विवाद

यह मामला सहारनपुर, अंबेडकरनगर, कन्नौज और जालौन में स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेजों में NEET-UG दाखिले से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, इन संस्थानों में स्पेशल कम्पोनेंट प्लान के तहत कुल आरक्षण करीब 91.76 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इसमें अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए सामान्य आरक्षण से अलग अतिरिक्त कोटा शामिल था।

इस व्यवस्था को कुछ NEET अभ्यर्थियों ने अदालत में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से आरक्षण की कुल सीमा और लागू व्यवस्था को लेकर कानूनी सवाल उठाए गए। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान विशेष आरक्षण व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाई।

हाई कोर्ट ने काउंसलिंग को लेकर क्या कहा?

हाई कोर्ट ने केवल विशेष आरक्षण व्यवस्था पर रोक लगाते हुए मेडिकल कॉलेजों की काउंसलिंग प्रक्रिया को पूरी तरह रोकने के बजाय सामान्य आरक्षण व्यवस्था के अनुसार आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य व्यवस्था में उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में SC के लिए 21 प्रतिशत, ST के लिए 2 प्रतिशत और OBC के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू है।

इस आदेश के बाद चार मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया को लेकर स्थिति बदल गई है और इसी संदर्भ में मायावती ने राज्य सरकार से आगे कानूनी कदम उठाने को कहा है।

मायावती ने सरकार की पैरवी पर उठाए सवाल

मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि राज्य सरकार को अदालत में यह पक्ष मजबूती से रखना चाहिए था कि इन चार मेडिकल कॉलेजों का निर्माण स्पेशल कम्पोनेंट प्लान के धन से हुआ है और अतिरिक्त आरक्षण को इसी योजना के उद्देश्य से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

उनका कहना है कि यदि राज्य सरकार इस तर्क को प्रभावी तरीके से अदालत के सामने रखती तो मामले पर अलग तरह से विचार हो सकता था। यह मायावती की ओर से किया गया राजनीतिक और कानूनी आकलन है।

अब सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग

हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद मायावती ने यूपी सरकार से सुप्रीम कोर्ट में अपील करने और राहत मांगने की अपील की है। उनका कहना है कि मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया भी इस फैसले से प्रभावित हो रही है, इसलिए राज्य सरकार को आगे की कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से इस मामले में आगे क्या कदम उठाया जाता है, यह महत्वपूर्ण होगा। हाई कोर्ट का मौजूदा आदेश चार मेडिकल कॉलेजों में विशेष आरक्षण व्यवस्था और NEET-UG काउंसलिंग से संबंधित है।

आरक्षण की सीमा पर कानूनी बहस

इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू आरक्षण की कुल सीमा को लेकर है। रिपोर्ट के अनुसार, हाई कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ताओं ने 50 प्रतिशत की सीमा से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया था। हाई कोर्ट ने इसी कानूनी पहलू पर विचार करते हुए विशेष आरक्षण व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाई।

दूसरी ओर, मायावती का तर्क स्पेशल कम्पोनेंट प्लान के उद्देश्य और उससे बनाए गए मेडिकल कॉलेजों में SC छात्रों के लिए अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराने से जुड़ा है। अब इस व्यवस्था की वैधानिकता और आगे की राहत का मामला उच्च न्यायालय के आदेश तथा संभावित अपील की कानूनी प्रक्रिया से तय होगा।

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