वॉशिंगटन डीसी/ तेहरान/तेल अवीव, 01 अगस्त 2026 । मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं कि अमेरिका और इजराइल ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के बीच रणनीतिक स्तर पर बातचीत और सैन्य विकल्पों पर मंथन चल रहा है। हालांकि किसी बड़े हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इस सैन्य योजना पर शुक्रवार को कैंप डेविड में हुई ट्रम्प की कैबिनेट बैठक में भी चर्चा हुई। बैठक के दौरान ट्रम्प ने कहा, “हम ईरान पर बहुत जोरदार हमला करेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि अब उन्हें ईरान पर भरोसा नहीं रहा, क्योंकि “वे झूठ बोलते हैं, बातचीत की बात करते हैं, लेकिन बार-बार अपना वादा तोड़ देते हैं।”
दूसरी तरफ ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अगर अमेरिका हमला करता है तो उसका जवाब पूरी तैयारी के साथ दिया जाएगा। उनके मुताबिक, जवाबी कार्रवाई में अमेरिका और इजराइल के अहम सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाएगा।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि संभावित कार्रवाई में ईरान के सैन्य ठिकानों और रणनीतिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने पर विचार किया जा सकता है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय देशों में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर पूरे मध्य-पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
अमेरिका और इजराइल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर चिंता जताते रहे हैं। वहीं ईरान ने भी किसी हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सैन्य कार्रवाई होती है तो इसका असर केवल तीनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाड़ी क्षेत्र, तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक कूटनीति पर भी पड़ सकता है। ऐसे में दुनिया की नजर अमेरिका, इजराइल और ईरान के अगले कदमों पर टिकी हुई है।
फिलहाल स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय नजर बनाए हुए है और कई देश तनाव कम करने तथा कूटनीतिक समाधान की अपील कर रहे हैं। किसी भी सैन्य कदम से पहले राजनीतिक और रणनीतिक पहलुओं पर गंभीर विचार किए जाने की संभावना है।