बेगूसराय, 30 जुलाई 2026 । बिहार के चर्चित बेगूसराय वार्डन रिंकू कुमारी हत्याकांड में पुलिस जांच ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। मामले की जांच की निगरानी में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विकास वैभव की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है। पटना हाई कोर्ट ने मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के लिए पुलिस पर भरोसा जताया था, जिस पर जांच टीम पूरी तरह खरी उतरती दिखाई दी। वैज्ञानिक साक्ष्यों, तकनीकी विश्लेषण और लगातार पूछताछ के आधार पर पुलिस ने हत्या की पूरी साजिश का खुलासा करने का दावा किया है।
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के वार्डन रिंकू कुमारी की आत्महत्या बात कह पुलिस ने 2021 में फाइल बंद कर दी थी। लेकिन पटना हाई कोर्ट के आदेश पर मगध रेंज के आईजी विकास वैभव ने जांच कर ये खुलासा किया कि वार्डन की हत्या रुपया विवाद में उसके ग्रामीण कौशल ने स्कूल के गार्ड अजीत कुमार बबलू के साथ मिलकर विद्यालय में ही गला दबाकर कर दी थी।
क्या था पूरा मामला?
आईपीएस विकास वैभव ने बताया कि 4 अप्रैल, 2021 को कस्तूरबा विद्यालय के वार्डन रिंकू देवी का डेड बॉडी स्कूल में पाया गया था। मृतक की पुत्री तेजस्विनी के आवेदन पर मामला दर्ज कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम में फांसी लगने से मौत सामने आई और इसी दिशा में अनुसंधान चलते रहा। पुलिस ने आत्महत्या हत्या का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। मामला हाई कोर्ट में पहुंचा तो उच्च न्यायालय ने अनुसंधान में कई विसंगतियां पाई। जिसके बाद उच्च न्यायालय द्वारा अप्रैल महीने में मुझे टीम बनाकर फिर से अनुसंधान करने का आदेश दिया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से जुटाए गए फोरेंसिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और डिजिटल साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। इसके आधार पर संदिग्धों की गतिविधियों का पता लगाया गया और पूछताछ के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए। अधिकारियों के अनुसार, इन सबूतों ने हत्या की पूरी घटना और उससे जुड़े लोगों की भूमिका स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
आईपीएस विकास वैभव अपनी पेशेवर कार्यशैली, पारदर्शी जांच और तकनीक आधारित पुलिसिंग के लिए जाने जाते हैं। उनके नेतृत्व में कई संवेदनशील मामलों की जांच प्रभावी ढंग से पूरी की गई है। बेगूसराय हत्याकांड की जांच में भी पुलिस ने हर पहलू की बारीकी से जांच करते हुए घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा और अदालत के समक्ष साक्ष्यों के आधार पर मामले को मजबूत बनाने की दिशा में काम किया।
पुलिस का कहना है कि इस मामले में जुटाए गए सभी साक्ष्यों को कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा। वहीं, जांच एजेंसियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिले और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके। इस कार्रवाई को बिहार पुलिस की तकनीकी और साक्ष्य आधारित जांच का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।