इंस्टाग्राम पर पहले दी थी धमकी, 11 दिन बाद अनुष्का को मारी गोली
सोशल मीडिया पोस्ट बना जांच का अहम सबूत
मेरठ , 30 जुलाई 2026 । यूपी के मेरठ में बुधवार शाम एक तरफा प्रेम के चलते हिस्ट्रीशीटर आदित्य प्रधान ने छात्रा अनुष्का को बीच सड़क पर चार गोलियां मार दीं। अनुष्का को गोली मारने की सनसनीखेज घटना में जांच के दौरान एक बड़ा खुलासा सामने आया है। पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी आदित्य ने वारदात से करीब 11 दिन पहले अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक धमकी भरा संदेश साझा किया था। पोस्ट में उसने लिखा था, “मेरे प्यार से भी बुरा मेरा बैर”, जिसे अब जांच एजेंसियां घटना से जोड़कर महत्वपूर्ण सबूत के रूप में देख रही हैं। पुलिस सोशल मीडिया गतिविधियों, चैट रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी गहन जांच कर रही है ताकि घटना के पीछे की पूरी साजिश और आरोपी की मानसिक स्थिति का पता लगाया जा सके।
यह घटना कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र की डिफेंस एन्क्लेव कॉलोनी की है। पुलिस जांच में सामने आया है कि वारदात अचानक नहीं हुई, बल्कि इसकी पटकथा कई दिन पहले लिखी जा चुकी थी। 18 जुलाई को आदित्य ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो स्टोरी साझा की थी, जिसमें लिखा था- ‘मेरे प्यार से भी बुरा मेरा बैर, सिर पर मार दूं गोली।’ इस पोस्ट के ठीक 11 दिन बाद उसने उसी धमकी को हकीकत में बदल दिया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी और पीड़िता एक-दूसरे को पहले से जानते थे। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी लंबे समय से पीड़िता का पीछा कर रहा था या उसे लगातार धमकियां दे रहा था। घटना के बाद आरोपी की सोशल मीडिया प्रोफाइल, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच अधिकारी प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रहे हैं। यदि इंस्टाग्राम पर की गई पोस्ट और अन्य डिजिटल सामग्री का घटना से सीधा संबंध स्थापित होता है, तो उन्हें अदालत में अहम साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया पर दी जाने वाली धमकियों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन धमकियों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए और ऐसे मामलों में समय रहते शिकायत एवं त्वरित कार्रवाई से गंभीर अपराधों को रोका जा सकता है।