कौन हैं IAS राजा गणपति? सख्त प्रशासनिक शैली के लिए चर्चित अधिकारी

ANM की 15 दिन की सैलरी रोकने के फैसले से फिर सुर्खियों में

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सीतापुर, 30जुलाई 2026 । यूपी के सीतापुर में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी राजा गणपति आर. एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उनके द्वारा एक सहायक नर्स एवं मिडवाइफ (ANM) की 15 दिन की सैलरी रोकने के आदेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक फैसले पर बहस शुरू हो गई, जबकि इससे पहले उनके तबादले के विरोध में स्थानीय लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन भी कर चुके हैं। राजा गणपति अपनी सख्त कार्यशैली, अनुशासन और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जाने जाते हैं।

लापरवाही पाए जाने पर जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. ने संबंधित एएनएम का 15 दिनों का वेतन रोकने के निर्देश दिए। वहीं, आशा कार्यकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी करने और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को नोटिस जारी करते हुए अग्रिम आदेशों तक उनका वेतन रोकने के निर्देश दिए। डीएम ने स्पष्ट कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के संचालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने दायित्वों का पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से निर्वहन सुनिश्चित करें।

राजा गणपति ने अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व और ग्रामीण विकास से जुड़े कई क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई है। अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने तथा सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता लाने के लिए वे समय-समय पर कड़े फैसले लेते रहे हैं। इसी कारण उन्हें एक अनुशासनप्रिय अधिकारी माना जाता है, हालांकि उनके कुछ निर्णय विवादों का कारण भी बने हैं।

हाल ही में एक एएनएम की 15 दिन की सैलरी रोकने के आदेश के बाद मामला चर्चा में आया। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई सेवा नियमों और कार्य में लापरवाही से जुड़े कारणों के आधार पर की गई, जबकि इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इससे पहले भी उनके स्थानांतरण (ट्रांसफर) के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए उन्हें वापस तैनात करने की मांग की थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनके कार्यकाल में प्रशासनिक व्यवस्था और जनसेवाओं में सुधार देखने को मिला था।

राजा गणपति का प्रशासनिक करियर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से जुड़ा रहा है। वे विभिन्न जिलों में तैनाती के दौरान विकास कार्यों की निगरानी, सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जन शिकायतों के त्वरित समाधान पर जोर देते रहे हैं। यही वजह है कि एक ओर उन्हें सख्त और अनुशासित अधिकारी के रूप में देखा जाता है, वहीं दूसरी ओर उनके समर्थक उन्हें जनहित में निर्णय लेने वाला प्रशासनिक अधिकारी मानते हैं।

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