ऋषिकेश, 24 जुलाई 2026 । उत्तराखंड के प्रसिद्ध शिक्षाविद विशेश्वरानंद कुकरेती ने अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में ऐसा निर्णय लिया, जिसने समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। उन्होंने मृत्यु के बाद अपनी देहदान करने का संकल्प लिया, ताकि उनकी देह का उपयोग चिकित्सा शिक्षा और शोध कार्यों के लिए किया जा सके।
तीर्थनगरी ऋषिकेश के प्रसिद्ध शिक्षाविद का निधन होने पर उनकी इच्छानुसार अधिवक्ता राकेश मियां के साथ उनके परिवार के सदस्यों ने उनका पार्थिव देह चिकित्सा और शोध कार्यों के लिए एम्स ऋषिकेश को सौंप दिया। उनके परिजनों ने बताया कि देहदान का प्रयोग अब चिकित्सा शिक्षा के माध्यम से मानव कल्याण के लिए किया जाएगा। इस दौरान एम्स संस्थान द्वारा देहदान करने वाले परिजनों को सम्मानित भी किया।
विशेश्वरानंद कुकरेती शिक्षा जगत से जुड़े एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व थे। उन्होंने लंबे समय तक शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दिया और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के साथ-साथ समाज में ज्ञान और जागरूकता फैलाने का काम किया। उनके देहदान के फैसले को चिकित्सा क्षेत्र और समाज सेवा की दिशा में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।
उनकी इच्छा के अनुसार उनकी पार्थिव देह को एम्स को सौंपा गया, जहां मेडिकल छात्रों और शोधकर्ताओं द्वारा इसका उपयोग अध्ययन और अनुसंधान के लिए किया जाएगा। चिकित्सा शिक्षा में देहदान का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इससे भावी डॉक्टरों को मानव शरीर की संरचना और चिकित्सा प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि देहदान केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए किया गया महत्वपूर्ण योगदान है। इससे मेडिकल शिक्षा को मजबूती मिलती है और नई चिकित्सा तकनीकों एवं उपचार पद्धतियों के विकास में सहायता मिल सकती है।
विशेश्वरानंद कुकरेती के इस कदम ने लोगों को अंगदान और देहदान के महत्व के प्रति जागरूक करने का काम किया है। उनका संदेश यही है कि जीवन के बाद भी इंसान समाज के लिए उपयोगी योगदान दे सकता है।