नई दिल्ली, 24 जुलाई 2026 । हालिया प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर विवाद गहरा गया है। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और घायलों के शरीर पर दिख रहे चोट के निशानों के आधार पर कई लोग दावा कर रहे हैं कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इस संबंध में उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया: पुलिस
साहिल की एक आंख में छर्रा लगा है तो इरशाद को कई छर्रे लगे हैं, लेकिन एक आंख के नीचे लगी है, जबकि विकास को हाथ में छर्रे लगने के निशान हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस लगातार यह कह रही है कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया। इसके बावजूद सामने आई चोटें और मेडिकल रिकॉर्ड कई सवाल खड़े कर रहे हैं। इन तीन मामलों में एक छात्र की आंख की रोशनी पर खतरा मंडरा रहा है, दूसरे युवक की सर्जरी हो चुकी है और तीसरे मामले में एक पत्रकार ने हाथ पर पैलेट जैसे घाव होने का दावा किया है।
घायलों का कहना है कि उनके शरीर पर मौजूद छोटे-छोटे घाव किसी सामान्य चोट जैसे नहीं हैं। दूसरी ओर, प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से घटना की जांच की जा रही है। यदि पैलेट गन या किसी अन्य भीड़-नियंत्रण उपकरण के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए हैं, तो उनकी पुष्टि जांच और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है।
इस मुद्दे ने मानवाधिकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों का भी ध्यान खींचा है। कई संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि भीड़ नियंत्रण के दौरान निर्धारित मानकों का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई की जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़ नियंत्रण के दौरान इस्तेमाल होने वाले किसी भी उपकरण का उपयोग तय नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप होना चाहिए। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और तथ्यों का सार्वजनिक होना आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
फिलहाल, घटना को लेकर अलग-अलग दावे और प्रतिदावे सामने आ रहे हैं। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।