पूर्व IPS अधिकारी ने धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ उठाए सवाल

स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र

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लखनऊ, 24  जुलाई 2026 । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर एक नया राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद सामने आया है। एक पूर्व आईपीएस अधिकारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर शिक्षा मंत्रालय सहित संबंधित मंत्रालयों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पत्र में कथित अनियमितताओं और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

NEET-UG विवाद से शिक्षा व्यवस्था की निगरानी पर उठे गंभीर सवाल

आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने अपने पत्र में NEET-UG 2024 परीक्षा के दौरान सामने आई गड़बड़ियों का प्रमुखता से उल्लेख किया है। अमिताभ ठाकुर ने अपने पत्र में कहा कि परीक्षा में हुई धांधली, इसके बाद शुरू हुई जांच, सर्वोच्च न्यायालय में चली लंबी सुनवाई और केंद्र सरकार की ओर से गठित की गई विशेषज्ञ समिति की प्रक्रिया ने देश की शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ मंत्रालय की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लिखा कि इन परिस्थितियों में शिक्षा मंत्रालय की प्रशासनिक कार्यप्रणाली का निष्पक्ष परीक्षण बेहद जरूरी हो गया है।

पूर्व आईपीएस अधिकारी ने अपने पत्र में कहा है कि शिक्षा से जुड़े मामलों में उठ रहे विवादों और विभिन्न आरोपों को देखते हुए निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर प्रशासनिक या संस्थागत कमियां रही हैं, तो उनकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए, ताकि तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने आ सके और जनता का भरोसा बना रहे।

पत्र में प्रधानमंत्री से आग्रह किया गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित मंत्रालयों की कार्यप्रणाली की समीक्षा कराई जाए और यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल, इस पत्र पर केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मामला अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर सरकार तथा अन्य संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।

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