चंडीगढ़, 23 जुलाई 2026 । शहीद परिवारों के अधिकारों और सम्मान से जुड़े एक मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए हरियाणा सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि शहीद परिवारों को मिलने वाली सुविधाओं और उनके अधिकारों के मामले में अनावश्यक कानूनी दांव-पेच नहीं चलने चाहिए। शहीदों के परिवारों के हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
जस्टिस निधि गुप्ता ने ब्रिगेडियर अभिमन्यु सिंह राठौड़ के बेटे सक्षम राठौड़ की याचिका मंजूर की। अदालत ने हरियाणा सरकार के अनुकंपा नियुक्ति से इन्कार करने वाले तीनों आदेश रद्द कर दिए। राज्य सरकार को सक्षम राठौड़ को चार माह में अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया।
ब्रिगेडियर राठौड़ की 30 जुलाई 2023 को लेह में ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान मृत्यु हुई थी। यह अभियान चीन की आक्रामक गतिविधियों के बीच चलाया जा रहा था। सेना ने 10 जनवरी 2024 को इसे बैटल कैजुअल्टी घोषित किया था। सक्षम राठौड़ ने 28 सितंबर 2018 की नीति के तहत नौकरी का दावा किया था। सरकार ने 16 फरवरी 2024, 24 मई 2024 और 4 दिसंबर 2025 के आदेशों से उनका दावा खारिज किया।
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि देश की सेवा में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले जवानों के परिवारों के साथ संवेदनशीलता और सम्मान के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए। ऐसे मामलों में तकनीकी अड़चनों और प्रक्रियात्मक देरी के कारण परिवारों को परेशान नहीं किया जा सकता।
अदालत ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहीद परिवारों को मिलने वाले लाभ और अधिकार समय पर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि मामले में उचित कदम उठाकर पीड़ित परिवार को राहत प्रदान की जाए।
हाई कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद सरकारी विभागों में भी चर्चा तेज हो गई है। अदालत ने यह संदेश दिया कि कल्याणकारी योजनाओं और शहीद परिवारों से जुड़े मामलों में प्रशासनिक संवेदनशीलता बेहद जरूरी है। केवल नियमों और प्रक्रियाओं का हवाला देकर किसी परिवार को उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
इस फैसले को शहीद परिवारों के सम्मान और अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत के निर्देश के बाद अब सरकार को मामले में आगे की कार्रवाई करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित परिवार को उसका हक मिल सके।