भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन लॉन्च को तैयार, 17 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी दिखाएंगे हरी झंडी

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नई दिल्ली/जींद , 16  जुलाई 2026 । भारत रेलवे के हरित परिवहन मिशन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन का शुभारंभ 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने की संभावना है। इस ट्रेन के संचालन के साथ भारत स्वच्छ, पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक रेल तकनीक अपनाने वाले देशों की सूची में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करेगा।

लोगों में उत्साह

पीएम मोदी की इस पोस्ट के बाद इस परियोजना को लेकर लोगों में उत्साह बढ़ गया है। यह परियोजना भारतीय रेलवे की ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल का हिस्सा है। इस योजना के तहत रेलवे भविष्य में 35 और हाइड्रोजन ट्रेनों को शुरू करने की तैयारी कर रहा है, ताकि विरासत (हेरिटेज) और ग्रामीण मार्गों पर चल रहे पुराने डीजल इंजनों की जगह पर्यावरण-अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराया जा सके।

ट्रेन की खासियत

  • नई ट्रेन को 10 कोच वाले हाइड्रोजन-चालित डीईएमयू सेट के रूप में तैयार किया गया है।
  • इसमें 682 सीटें हैं, जबकि कुल 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है।
  • परीक्षण के दौरान ट्रेन ने इससे अधिक गति हासिल की थी लेकिन नियमित संचालन के लिए इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है।
  • चूंकि यह अभी एक पायलट परियोजना है, इसलिए इसे नियंत्रित और सावधानीपूर्वक तरीके से शुरू किया जा रहा है।

हाइड्रोजन ट्रेन डीजल ट्रेनों की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण-अनुकूल मानी जाती है। इसमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल से बिजली उत्पन्न होती है, जिससे ट्रेन चलती है और संचालन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता। इसके बजाय केवल जलवाष्प (वॉटर वेपर) और ऊष्मा निकलती है, जिससे प्रदूषण में कमी लाने में मदद मिलती है।

भारतीय रेलवे का उद्देश्य भविष्य में चरणबद्ध तरीके से हरित ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देना और कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना को रेलवे के आधुनिकीकरण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस तकनीक से ईंधन दक्षता बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना देश में स्वदेशी तकनीक, नवाचार और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में अहम साबित होगी। यदि यह पहल सफल रहती है, तो भविष्य में अन्य रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों के संचालन का रास्ता खुल सकता है।

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