मॉस्को, 16 जुलाई 2026 । यूक्रेन द्वारा रूस के ऊर्जा ढांचे और तेल परिवहन से जुड़े ठिकानों पर हाल के हमलों के बाद रूस में ईंधन आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यूक्रेन ने रूस के तथाकथित “शैडो फ्लीट” से जुड़े तेल टैंकरों और समुद्री लॉजिस्टिक्स को निशाना बनाया है, जिससे कुछ विश्लेषक इसे “होर्मुज जैसी स्थिति” बनने की आशंका से जोड़ रहे हैं।
एजोव सागर लंबे समय तक यूक्रेन की पहुंच से बाहर रहा था। रूस इसी समुद्री रास्ते का इस्तेमाल यूक्रेन पर हमले करने और दक्षिणी रूस से तेल, गेहूं, स्टील, सूरजमुखी का तेल और दूसरे सामान दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने के लिए करता था। लेकिन हाल के महीनों में यूक्रेन के ड्रोन हमले काफी प्रभावी हो गए हैं और अब इस समुद्री रास्ते पर भी रूस का दबदबा कमजोर पड़ने लगा है।
यूक्रेन की ड्रोन सेना के कमांडर रॉबर्ट ब्रोवदी ने बुधवार को दावा किया कि पिछले 9 दिनों में एजोव सागर में रूस के 116 जहाजों को निशाना बनाया गया है। पहले यूक्रेन के हमले मुख्य रूप से रूस के शैडो ऑयल टैंकरों और युद्धपोतों तक सीमित थे, लेकिन अब हमलों का दायरा बढ़ गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यूक्रेन के ड्रोन हमलों के कारण आज़ोव सागर और काला सागर क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे ईंधन आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ने और रूस के कुछ हिस्सों में पेट्रोल की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। विश्लेषकों का कहना है कि “होर्मुज जैसा संकट” शब्द का उपयोग इस संदर्भ में किया जा रहा है कि जिस तरह होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है, उसी प्रकार रूस के प्रमुख समुद्री तेल मार्गों और निर्यात नेटवर्क पर लगातार हमले उसके ऊर्जा निर्यात और घरेलू ईंधन आपूर्ति पर गंभीर असर डाल सकते हैं। हालांकि, रूस में होर्मुज जैसी भौगोलिक स्थिति नहीं है और यह तुलना मुख्यतः ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान की आशंका को दर्शाने के लिए की जा रही है।
इस बीच, कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि रिफाइनरियों पर हमलों के बाद रूस ने ईंधन आपूर्ति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त स्रोतों की तलाश शुरू कर दी है। हालांकि, स्थिति लगातार बदल रही है और दोनों पक्षों की सैन्य गतिविधियों के बीच ऊर्जा क्षेत्र पर असर को लेकर निगरानी जारी है।