हरियाणा में गाय की तेरहवीं बनी चर्चा का विषय

11 गांवों को दिया गया निमंत्रण और 650 किलो रसगुल्लों का लगाया गया भोग

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सोनीपत , 15  जुलाई 2026 । हरियाणा में एक अनोखा और भावनात्मक आयोजन चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक गाय की मृत्यु के बाद उसकी तेरहवीं का आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। इस कार्यक्रम में आसपास के 11 गांवों के लोगों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने इसमें भाग लिया।

गाय को बेटी की तरह पाला

करीब 18 वर्षों तक परिवार के साथ रहने वाली नंदिनी से घर के सभी सदस्यों का गहरा भावनात्मक रिश्ता था। मंजीत तिहाड़ा ने बताया कि नंदिनी तीन महीने की बछड़ी के रूप में उनके घर आई थी। बाद में उसकी मां की प्रसव के दौरान मृत्यु हो गई, जिसके बाद पूरे परिवार ने उसे बेटी की तरह पाल-पोसकर बड़ा किया। परिवार के अनुसार, उस समय घर में कोई बेटी नहीं थी, इसलिए नंदिनी से उनका लगाव और अधिक बढ़ गया। घर के बच्चों ने उसके साथ खेलते हुए बचपन बिताया और उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। आज भी उसकी 6 पीढ़ियां परिवार के पास मौजूद हैं।

तेरहवीं समारोह के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, श्रद्धांजलि सभा और सामूहिक भंडारे का आयोजन किया गया। आयोजन की विशेषता यह रही कि गाय की स्मृति में 650 किलो रसगुल्लों का भोग लगाया गया, जिसके बाद श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के बीच प्रसाद वितरित किया गया। इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

आयोजकों का कहना है कि गाय को परिवार के सदस्य के समान सम्मान दिया जाता था। उसकी मृत्यु के बाद श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने के लिए तेरहवीं का आयोजन किया गया, ताकि समाज में पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और सेवा का संदेश भी दिया जा सके।

यह अनूठा आयोजन अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। बड़ी संख्या में लोग इस समारोह को देखने और श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पशुओं के प्रति प्रेम, सम्मान और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक भी है।

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