नई दिल्ली/चंडीगढ़, 15 जुलाई 2026 । पंजाब की राजनीति में कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर चर्चा का विषय बनी हुई है। पार्टी के भीतर नेतृत्व, संगठन और रणनीति को लेकर सामने आ रहे मतभेदों को राजनीतिक विश्लेषक आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए चुनौती के रूप में देख रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि यह असंतोष लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर पार्टी की चुनावी तैयारियों और संगठनात्मक मजबूती पर पड़ सकता है।
आम आदमी पार्टी के सामने भी कई चुनौतियां
पंजाब में फरवरी-मार्च 2022 चुनाव से पहले भी कांग्रेस में आंतरिक कलह चरम पर था। कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद सितंबर 2021 में कुछ महीनों के लिए चन्नी मुख्यमंत्री बने। वह पहले दलित नेता थे, जो राज्य के शीर्ष पद पर पहुंचे थे। तब कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच विवाद था। पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी ऐतिहासिक बहुमत के साथ राज्य की सत्ता में आई थी। वह इस बार भी सत्ता में आने का दावा कर रही है, लेकिन उसके सामने कई चुनौतियां हैं। राज्य के मुख्य विपक्षी दल के सामने इन चुनौतियों को भुनाने का मौका है। मगर कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं दिखती। इसी वजह से बीजेपी के हौसले बुलंद हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि किसी भी चुनाव में एकजुट संगठन और स्पष्ट नेतृत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में कांग्रेस के भीतर जारी मतभेद विपक्षी दलों के लिए अवसर बन सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आम आदमी पार्टी (आप) इस स्थिति का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर सकती हैं और अपने जनाधार को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं।
हालांकि, कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि पार्टी के भीतर उठने वाले मुद्दों का समाधान संगठनात्मक स्तर पर किया जाएगा और सभी नेता मिलकर आगामी चुनावों की तैयारी करेंगे। पार्टी नेतृत्व लगातार कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के साथ संवाद बनाए हुए है ताकि किसी भी प्रकार की नाराजगी को दूर किया जा सके।
फिलहाल पंजाब की राजनीति में सभी दल अपने-अपने संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच सक्रियता बढ़ाने में जुटे हैं। आने वाले समय में कांग्रेस की आंतरिक स्थिति और विपक्षी दलों की रणनीति राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।