हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को दूसरा सेवा विस्तार: केंद्र की मंजूरी के बाद कार्यकाल बढ़ा

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हरियाणा , 01 जुलाई 2026 । हरियाणा सरकार के प्रशासनिक नेतृत्व से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को दूसरा सेवा विस्तार मिल गया है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया, जिससे वे फिलहाल मुख्य सचिव के पद पर अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे।

मुख्य सचिव की दौड़ में थे ये आईएएस अधिकारी

मुख्य सचिव बनने की दौड़ में 1990 बैच के आईएएस अधिकारी सुधीर राजपाल, डॉ. सुमिता मिश्रा और राजा शेखर वुंडरू शामिल माने जा रहे थे। सुधीर राजपाल 30 नवंबर 2026 को सेवानिवृत्त होंगे, जबकि राजा शेखर वुंडरू का कार्यकाल 31 जुलाई 2026 को पूरा हो जाएगा। वहीं, डॉ. सुमिता मिश्रा 31 जनवरी 2027 को रिटायर होंगी। अनुराग रस्तोगी देश के उन चुनिंदा प्रशासनिक अधिकारियों में शामिल हो गए हैं,

अनुराग रस्तोगी राज्य प्रशासन के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों में शामिल हैं और उनके नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं, विकास परियोजनाओं तथा प्रशासनिक सुधारों पर कार्य किया जा रहा है। सेवा विस्तार मिलने के बाद प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद जारी आदेश के अनुसार, अनुराग रस्तोगी निर्धारित अवधि तक हरियाणा के मुख्य सचिव के रूप में कार्य करते रहेंगे। माना जा रहा है कि इस निर्णय से राज्य सरकार की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और नीतिगत फैसलों के क्रियान्वयन में निरंतरता बनी रहेगी।

उनके कार्यकाल के दौरान ई-गवर्नेंस, निवेश प्रोत्साहन, आधारभूत ढांचे के विकास, डिजिटल प्रशासन, राजकोषीय प्रबंधन और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। माना जा रहा है कि आगामी महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाओं और नीतिगत निर्णयों को समय पर पूरा करने के लिए उनके अनुभव का लाभ उठाने के उद्देश्य से यह सेवा विस्तार दिया गया है।

केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद मिला यह दूसरा सेवा विस्तार दर्शाता है कि प्रशासनिक स्तर पर उनके अनुभव और नेतृत्व पर भरोसा कायम है। इससे राज्य में चल रही विकास योजनाओं, निवेश परियोजनाओं, प्रशासनिक सुधारों और नीति क्रियान्वयन की प्रक्रिया में निरंतरता बनी रहेगी। यह निर्णय राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच बेहतर प्रशासनिक समन्वय का भी संकेत माना जा रहा है।

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