हल्द्वानी में NEET छात्रा की मौत से सनसनी, कमरे से मिली डायरी में लिखी भावुक बातें

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हल्द्वानी , 26 जून्‌ 2026 । उत्तराखंड के हल्द्वानी में एक NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। घटना के बाद पुलिस ने छात्रा के कमरे की तलाशी ली, जहां से एक डायरी बरामद हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, डायरी में कुछ व्यक्तिगत टिप्पणियां और भावनात्मक बातें लिखी मिली हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

पुलिस के अनुसार मंगलवार देर रात एक युवक ने अंजलि की एक दोस्त को फोन कर बताया कि उसका फोन नहीं उठ रहा है। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। कमरे में अंजलि दुपट्टे से झूलते हुई पाई गई। आनन-फानन में खिड़की की जाली काटकर उसे नीचे उतारा गया। इसके बाद सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। हालांकि पुलिस को कमरे से एक डायरी मिली है, जिसमें लिखा है, ‘एक को छोड़ दिया है, दूसरे को नहीं छोड़ूंगी।’ पुलिस मामले को संदिग्ध मानते हुए सभी एंगल से जांच कर रही है। मृतका का फोन कब्जे में लिया गया है। पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, डायरी में लिखा एक वाक्य—“एक को छोड़ दिया, दूसरे को नहीं छोड़ूंगी”—जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस कथित नोट के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी। डायरी की सामग्री और अन्य साक्ष्यों की फॉरेंसिक तथा कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की जा रही है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और कमरे से मिले दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा अन्य साक्ष्यों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि छात्रा की मौत के कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लगाया जाएगा। पुलिस छात्रा के परिवार, परिचितों, शिक्षकों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों को समझा जा सके। अधिकारियों ने कहा है कि मामले के हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

एमपी शिवपुरी के रहने वाले रघुवीर जाटव ने पहले अपने बेटे को कोचिंग के लिए हल्द्वानी भेजा था। बेटे ने यहीं से नीट की कोचिंग पास कर अभी एम्स भोपाल से पढ़ाई कर रहे हैं। अब पिता ने बेटी को भी इसी सपने को पूरा करने के लिए भेजा था। लेकिन बेटे की तरह बेटी का सपना पूरा नहीं हो पाया।

इस घटना ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संवाद और भावनात्मक सहयोग की आवश्यकता पर भी चर्चा को तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक और भावनात्मक समर्थन उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है।

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