चंडीगढ़, 26 जून् 2026 । केंद्र सरकार के संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इन्हीं अटकलों के बीच पंजाब से केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विभिन्न राजनीतिक हलकों में तीन नेताओं के नाम चर्चा में हैं, जिनमें राघव चड्ढा का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में केंद्र सरकार या संबंधित राजनीतिक दलों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
आप के दो पूर्व नेता हैं रेस में
पश्चिम बंगाल की जीत के बाद पंजाब को गंभीरता से ले रही बीजेपी राज्य को केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल में अधिक तवज्जो दे सकती है। चर्चा है कि पंजाब में AAP छोड़कर आए नेताओं को इनाम मिल सकता है। इनमें सेलिब्रेटी फेस राघव चड्ढा का नाम सबसे आगे है। उनके साथ अशोक मित्तल (लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी) का भी नाम चल रहा है। चर्चा है कि दोनों में किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन अभी फैसला नहीं हुआ है। रवनीत बिट्टू को बीजेपी चुनावों में झोंकना चाहती है। उनकी जगह पर हाल ही में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद बने तरुण चुघ को लाया जा सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कद्दावर नेता चुघ पंजाब चुनाव में पार्टी को मजबूती देंगे। वह पंजाब से ही आते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मंत्रिमंडल में फेरबदल होता है, तो विभिन्न राज्यों और सहयोगी दलों के प्रतिनिधित्व को संतुलित करने की कोशिश की जा सकती है। पंजाब जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य को अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की अटकलें भी इसी संदर्भ में देखी जा रही हैं।
हालांकि, राघव चड्ढा वर्तमान में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उनके नाम को लेकर चल रही चर्चाएं केवल राजनीतिक अटकलों पर आधारित हैं। किसी भी नेता को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने संबंधी अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से घोषित किए जाने के बाद ही स्पष्ट होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल से जुड़ी खबरों के दौरान कई नेताओं के नाम चर्चा में आते रहते हैं, लेकिन अंतिम सूची अक्सर आधिकारिक घोषणा के समय ही सामने आती है। इसलिए मौजूदा दावों को पुष्टि के बजाय राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
फिलहाल राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजर केंद्र सरकार के संभावित फैसले पर टिकी हुई है। यदि मंत्रिमंडल में बदलाव होता है, तो यह स्पष्ट होगा कि किन राज्यों और नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं।