नई दिल्ली, पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज एस श्रीसंत ने भारतीय क्रिकेट टीम की मौजूदा स्थिति पर अपनी राय रखते हुए कहा है कि टीम को केवल एक कोच की नहीं, बल्कि एमएस धोनी जैसे अनुभवी मेंटर की जरूरत है। श्रीसंत का मानना है कि बड़े टूर्नामेंटों और दबाव वाले मुकाबलों में धोनी जैसा मार्गदर्शन खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को मजबूत बना सकता है।
43 साल के श्रीसंत ने कहा- ‘कोच बदल दीजिए। भारत को कोच नहीं, मेंटर की जरूरत है।’ उन्होंने लल्लनटॉप से कहा- ‘खिलाड़ियों पर ज्यादा दबाव बनाने के बजाय मार्गदर्शन और भरोसा देने वाला नेतृत्व टीम के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है।’
श्रीसंत ने भारतीय टेस्ट टीम के हालिया प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली सीरीज हार पर गंभीर की कोचिंग शैली पर आपत्ति जताई। भारतीय टीम पिछले साल अपने घर में साउथ अफ्रीका से 2-0 से हार गई थी। तब भी गंभीर की कोचिंग पर सवाल उठे थे।
श्रीसंत ने कहा कि धोनी की सबसे बड़ी ताकत उनकी शांत सोच, मैच की परिस्थितियों को समझने की क्षमता और खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकलवाने की कला रही है। उनके अनुसार भारतीय टीम में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन कठिन परिस्थितियों में सही दिशा दिखाने वाला मेंटर टीम के लिए बड़ा अंतर पैदा कर सकता है।
पूर्व तेज गेंदबाज ने यह भी कहा कि धोनी का अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। उन्होंने याद दिलाया कि कप्तान के रूप में धोनी ने भारत को कई ऐतिहासिक सफलताएं दिलाईं और उनकी रणनीतिक समझ आज भी क्रिकेट जगत में मिसाल मानी जाती है। श्रीसंत के मुताबिक, ड्रेसिंग रूम में धोनी जैसी शख्सियत की मौजूदगी खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने में मदद कर सकती है।
हालांकि, यह केवल श्रीसंत की व्यक्तिगत राय है। भारतीय क्रिकेट टीम के कोचिंग ढांचे और भविष्य की योजनाओं को लेकर अंतिम निर्णय BCCI और टीम प्रबंधन के स्तर पर लिया जाता है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि कोच और मेंटर दोनों की भूमिकाएं अलग-अलग होती हैं और टीम की जरूरतों के अनुसार दोनों का संतुलन महत्वपूर्ण हो सकता है।
भारतीय क्रिकेट में धोनी की भूमिका को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में श्रीसंत का यह बयान क्रिकेट प्रशंसकों के बीच नई बहस को जन्म दे सकता है कि टीम के विकास और बड़े टूर्नामेंटों में सफलता के लिए कोचिंग के साथ-साथ अनुभवी मेंटरशिप कितनी अहम है।