स्कूलों में पढ़ाई पर असर की आशंका: सर्वे कार्य में 17 हजार से अधिक शिक्षकों की ड्यूटी, शिक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल

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पंजाब , 18 जून्‌ 2026 । राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को लेकर नई चिंता सामने आई है। विभिन्न सर्वेक्षण और प्रशासनिक कार्यों के लिए 17,000 से अधिक शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने के बाद शिक्षा जगत में बहस तेज हो गई है। शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में शिक्षकों के गैर-शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

इस ड्रग सेंसस और ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार स्कीम’ के नाम पर करीब 20 हजार टीचरों को स्कूलों से निकाल दिया गया है। हजारों टीचरों ने मई में सेंसस का पहला फ़ेज पूरा कर लिया है और अब जून में दूसरा फेज करेंगे। इस बीच, नवंबर में विधानसभा चुनाव कराने की तैयारी चल रही है, इसलिए हज़ारों टीचर करीब 2 महीने में वह प्रोसेस पूरा कर लेंगे। सीनियर वाइस प्रेसिडेंट दविंदर सिंह सिद्धू, जॉइंट सेक्रेटरी गुरप्रीत सिंह खन्ना ने भी BLO और जनगणना में लगे टीचरों के ट्रांसफर रोकने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अपने घरों से सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे टीचर ट्रांसफर का इंतजार कर रहे थे। लेकिन डिपार्टमेंट का अचानक यह फैसला लेना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।

जानकारी के अनुसार, संबंधित विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण अभियान चलाया जा रहा है, जिसके लिए स्कूलों में कार्यरत हजारों शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस दौरान कई शिक्षकों को नियमित कक्षाओं से समय निकालकर फील्ड कार्य, डेटा संग्रहण और रिपोर्ट तैयार करने जैसे कार्य करने पड़ रहे हैं।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षकों का प्राथमिक दायित्व विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। यदि लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में उनकी ड्यूटी लगाई जाती है, तो इसका सीधा प्रभाव कक्षा शिक्षण और छात्रों की सीखने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। कई संगठनों ने सरकार से ऐसे कार्यों के लिए अलग व्यवस्था बनाने की मांग भी की है।

वहीं, प्रशासन का तर्क है कि सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़े विभिन्न सरकारी योजनाओं और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा करना जरूरी है और इसके लिए उपलब्ध मानव संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों से यथासंभव मुक्त रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि सर्वे और प्रशासनिक कार्य आवश्यक हैं, तो इसके लिए अलग कर्मियों की नियुक्ति या वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।

फिलहाल, शिक्षकों की ड्यूटी को लेकर स्कूलों, अभिभावकों और शिक्षा विभाग के बीच चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन शिक्षण कार्य और सर्वेक्षण गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने के लिए क्या कदम उठाता है।

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