बिहार, 15 जून् 2026 । बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम कर रही है, जिससे छात्रों को कोचिंग सेंटरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सम्राट चौधरी के अनुसार, यदि सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर शिक्षण संसाधन और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो कोचिंग संस्थानों की आवश्यकता स्वतः कम हो जाएगी।
गयाजी में सम्राट चौधरी ने कहा कि हमने कहा कि हमें सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को अच्छा करना है। इसके लिए हम सभी प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोल रहे हैं, जहां डिग्री कॉलेज नहीं है। बिहार के 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज नहीं हैं, वहां डिग्री कॉलेज खोल रहे हैं। सभी प्रखंडों में हम मॉडल स्कूल बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य शिक्षा प्रणाली को इतना मजबूत बनाना है कि छात्र अपनी नियमित पढ़ाई के आधार पर ही प्रतियोगी परीक्षाओं और शैक्षणिक चुनौतियों का सामना कर सकें। इसके लिए शिक्षकों की गुणवत्ता, डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लासरूम, बेहतर पाठ्यक्रम क्रियान्वयन और नियमित मूल्यांकन जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सम्राट चौधरी ने यह भी संकेत दिया कि शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधारों के जरिए छात्रों और अभिभावकों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करने का प्रयास किया जाएगा। उनका मानना है कि आज बड़ी संख्या में परिवार बच्चों की कोचिंग पर भारी खर्च करने को मजबूर हैं, जबकि आदर्श स्थिति यह होनी चाहिए कि विद्यालयों में ही छात्रों को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।
राजनीतिक और शैक्षणिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में स्कूल और कॉलेज स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार कर पाती है, तो इससे कोचिंग संस्कृति पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि इसके लिए दीर्घकालिक निवेश, बेहतर शिक्षण ढांचा और लगातार निगरानी की आवश्यकता होगी। फिलहाल सम्राट चौधरी का यह बयान बिहार की शिक्षा नीति और कोचिंग उद्योग को लेकर नई बहस का विषय बन गया है।