रोहतक , 10 जून् 2026 । रोहतक के डी-पार्क क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड ने कई व्यापारियों और दुकानदारों की वर्षों की मेहनत को पलभर में राख कर दिया। आग की घटना के बाद बाजार का दृश्य पूरी तरह बदल गया है। जहां कुछ दिन पहले तक ग्राहकों की भीड़, व्यापारिक गतिविधियां और रौनक दिखाई देती थी, वहीं अब जली हुई दुकानों, टूटे ढांचों और मलबे के ढेर नजर आ रहे हैं।
आग इतनी भयानक रूप ले चुकी थी की चारों तरफ ही कोहराम मचा हुआ था। शोरूम मालिकों का कहना है कि यहीं से उनका परिवार और उनके साथ काम करने वालों का परिवार चलता था l इसी व्यवसाय के साथ उन्होंने अपने परिवार और अपने लिए काफी सपने देखे थे लेकिन सब कुछ बर्बाद हो गया ।
घटना के बाद प्रभावित दुकानदारों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों की मेहनत, बचत और निवेश से अपने कारोबार को खड़ा किया था, लेकिन आग ने सब कुछ खत्म कर दिया। कई व्यापारियों का कहना है कि उनकी दुकानों में रखा लाखों रुपये का सामान जलकर नष्ट हो गया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
दुकानदारों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि उन्हें सामान निकालने का भी पर्याप्त समय नहीं मिला। कई लोगों ने बताया कि वे केवल अपनी जान बचाकर बाहर निकल सके। घटना के बाद जब उन्होंने अपनी दुकानों की स्थिति देखी तो वहां केवल जले हुए अवशेष और मलबा ही बचा था।
स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने प्रभावित दुकानदारों को राहत और मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि छोटे और मध्यम स्तर के कई व्यापारी पूरी तरह से अपने कारोबार पर निर्भर हैं और इस नुकसान से उबरना उनके लिए आसान नहीं होगा। उन्होंने प्रशासन से आर्थिक सहायता और पुनर्वास की व्यवस्था करने का आग्रह किया है।
अग्निशमन विभाग और प्रशासन घटना के कारणों की जांच कर रहे हैं। शुरुआती स्तर पर शॉर्ट सर्किट या अन्य तकनीकी कारणों की संभावना पर विचार किया जा रहा है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है और प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
फिलहाल डी-पार्क क्षेत्र के व्यापारी अपने नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। बाजार में पसरा सन्नाटा और जले हुए ढांचे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि आग ने केवल दुकानों को नहीं, बल्कि कई परिवारों की आजीविका और सपनों को भी गहरा आघात पहुंचाया है।