पटना/दिल्ली, 10 जून् 2026 । बिहार में तकनीकी निवेश और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर एक बड़ी संभावना सामने आई है। दिल्ली में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और गूगल के वाइस प्रेसिडेंट चंदू थोटा के बीच हुई मुलाकात के बाद राज्य में गूगल के संभावित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) की स्थापना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। यह मुलाकात बिहार को देश के उभरते टेक्नोलॉजी और नवाचार केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैठक के दौरान बिहार में डिजिटल इकोसिस्टम, आईटी निवेश, स्किल डेवलपमेंट और तकनीकी क्षेत्र में रोजगार सृजन की संभावनाओं पर चर्चा हुई। राज्य सरकार लंबे समय से बड़े तकनीकी निवेशकों को आकर्षित करने का प्रयास कर रही है और इसी रणनीति के तहत वैश्विक कंपनियों के साथ संवाद बढ़ाया जा रहा है।
यदि बिहार में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित होता है, तो इससे राज्य में आईटी, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं से जुड़े हजारों रोजगार अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही राज्य के युवाओं को अपने गृह राज्य में ही उच्च स्तरीय तकनीकी करियर के अवसर मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ऐसे केंद्र होते हैं, जहां से तकनीकी विकास, अनुसंधान, डेटा प्रबंधन, ग्राहक सेवाएं, साइबर सुरक्षा और विभिन्न वैश्विक परिचालन गतिविधियों का संचालन किया जाता है। भारत के कई बड़े शहर पहले से ही GCC हब के रूप में विकसित हो चुके हैं, और अब बिहार भी इस दिशा में कदम बढ़ाता नजर आ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई बड़ी वैश्विक तकनीकी कंपनी राज्य में निवेश करती है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव स्टार्टअप इकोसिस्टम, शिक्षा संस्थानों, कौशल विकास कार्यक्रमों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। इससे बिहार की निवेश-अनुकूल छवि को मजबूती मिल सकती है।
फिलहाल गूगल की ओर से बिहार में GCC स्थापित करने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन उपमुख्यमंत्री और कंपनी प्रतिनिधियों की मुलाकात ने संभावनाओं को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। आने वाले समय में यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो यह बिहार के तकनीकी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है।