नैनीताल, 09 जून् 2026 । उत्तराखंड के नैनीताल मे प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र कैंची धाम में 15 जून को स्थापना दिवस मेले का आयोजन किया जाएगा। हर वर्ष की तरह इस बार भी देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। बाबा नीम करौली महाराज के भक्तों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है, जिसके चलते प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
कैंची धाम की स्थापना 15 जून 1964 को हुई थी, इसी दिन नीम करौली बाबा ने इस पवित्र आश्रम का उद्घाटन किया था। तब से 15 जून को हर साल नीम करौरी बाबा के जन्म दिन पर कैंची धाम आश्रम में मेले का आयोजन होता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के कैंची धाम पहुंचने की संभावना है।
मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, यातायात और सुविधाओं को लेकर विशेष व्यवस्था की जा रही है। पुलिस प्रशासन द्वारा अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी, जबकि प्रमुख मार्गों पर यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया जा सकता है। भीड़ प्रबंधन के लिए बैरिकेडिंग, प्रवेश और निकास मार्गों का अलग-अलग निर्धारण तथा निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, चिकित्सा सहायता, अस्थायी शौचालय और विश्राम स्थलों की व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी अलर्ट मोड पर रखा जाएगा ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसके अलावा पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए निर्धारित स्थानों पर अतिरिक्त इंतजाम किए जाएंगे।
मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को लेकर भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। स्थानीय प्रशासन, मंदिर समिति और विभिन्न विभागों के अधिकारी तैयारियों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं।
कैंची धाम का स्थापना दिवस केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक आस्था और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक माना जाता है। हर साल यहां लाखों श्रद्धालु बाबा नीम करौली महाराज के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में 15 जून का यह आयोजन उत्तराखंड के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जा रहा है।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा से पहले यातायात संबंधी दिशा-निर्देशों की जानकारी प्राप्त करें, निर्धारित मार्गों का पालन करें और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें, ताकि सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन का लाभ मिल सके।