लखनऊ में CM योगी का बड़ा बयान: ‘देश के प्रति निष्ठा नहीं रखने वालों के लिए भारत धर्मशाला नहीं’

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लखनऊ , 09 जून्‌ 2026 । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, नागरिक कर्तव्यों और देशभक्ति के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत उन लोगों के लिए “धर्मशाला” नहीं हो सकता जो देश के प्रति निष्ठा नहीं रखते। मुख्यमंत्री का यह बयान सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।

उन्होंने कहा, ”तोड़ने वाली ताकतें जाति, भाषा, क्षेत्र के नाम पर विभाजित करने की चेष्टा करेंगी, लेकिन भारत की संत शक्ति समाज को एकजुट कर देश को आगे ले जाना चाहती हैं। व्यासपीठ द्वारा जिस मर्म को समझाने का प्रयास किया गया, हमें उसे आत्मसात करना होगा। कथा केवल सुनने की नहीं, बल्कि अंगीकार करने की महत्वपूर्ण कड़ी का हिस्सा है।”

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी सांस्कृतिक विरासत, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता से जुड़ी हुई है, इसलिए देश के प्रति प्रतिबद्धता और सम्मान हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए।

योगी आदित्यनाथ ने कानून व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां कानून का शासन मजबूत हो और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए कोई स्थान न हो। उनके अनुसार, देश की प्रगति और सुरक्षा के लिए नागरिकों और शासन तंत्र दोनों को समान रूप से जिम्मेदार भूमिका निभानी होगी।

मुख्यमंत्री के इस बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। समर्थक इसे राष्ट्रहित और राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण संदेश बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इस पर अपनी अलग राय व्यक्त कर सकते हैं। ऐसे बयानों का प्रभाव अक्सर राजनीतिक विमर्श और सार्वजनिक बहस में भी दिखाई देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय पहचान, नागरिक दायित्व और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े मुद्दे भारतीय राजनीति में लंबे समय से चर्चा का केंद्र रहे हैं। इसलिए जब किसी प्रमुख राजनीतिक नेता की ओर से इस प्रकार का बयान दिया जाता है, तो वह व्यापक सार्वजनिक और राजनीतिक बहस को जन्म देता है।

फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर चर्चा में है। आने वाले दिनों में इस पर अलग-अलग दलों और संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है, जिससे इस मुद्दे पर बहस और तेज हो सकती है।

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