वाराणसी में मांस-मछली बिक्री पर सियासत तेज, मौलाना रशीद फरंगी महली बोले
वाराणसी , 08 जून् 2026 । उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी वाराणसी में धार्मिक स्थलों और प्रमुख मार्गों के आसपास मांस एवं मछली की बिक्री को लेकर लिए गए प्रशासनिक फैसले पर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना रशीद फरंगी महली ने कहा कि यदि मांस और मछली की दुकानों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जाते हैं या उन्हें दूर स्थानों पर स्थानांतरित किया जाता है, तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि परिवहन लागत बढ़ने, आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने और व्यापारिक गतिविधियों में बाधा आने के कारण नॉनवेज खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
शराब की दुकानें भी हटाई जाएं: सैयद सैफ अब्बास नकवी
इससे पहले मुस्लिम धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास नकवी ने कहा था कि यदि तीर्थस्थलों के आसपास मीट की दुकानों को दूर हटाया जा रहा है तो शराब की दुकानों को भी ऐसे धार्मिक स्थलों के पास से हटाना चाहिए। सभी समुदायों के पूजा स्थलों और तीर्थ क्षेत्रों का सम्मान होना चाहिए। यह मुद्दा केवल किसी एक समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
मौलाना ने यह भी कहा कि देश के संविधान में सभी समुदायों को अपने व्यवसाय और खान-पान की स्वतंत्रता प्राप्त है, इसलिए किसी भी निर्णय को लागू करते समय सभी पक्षों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान आवश्यक है, लेकिन इसके साथ-साथ उन लोगों की आजीविका भी प्रभावित नहीं होनी चाहिए जो वर्षों से इस व्यापार से जुड़े हुए हैं।
इस बीच वाराणसी में प्रशासनिक फैसले को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और व्यापारिक संघों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे व्यापारिक गतिविधियों पर अनावश्यक दबाव मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बिगड़ता है, तो मांस और मछली के दाम बढ़ सकते हैं, जिसका असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि इसमें धार्मिक भावनाएं, व्यापारिक हित और आम जनता की आवश्यकताएं तीनों जुड़ी हुई हैं।