मुजफ्फरपुर , 04 जून् 2026 । बिहार के मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल में लगी भीषण आग की घटना ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल प्रशासन के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के बाद जहां स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां नुकसान का आकलन करने तथा कारणों की जांच में जुटी हैं, वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की चुप्पी राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है।
मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा इलाके में स्थित प्रसिद्ध प्रसाद हॉस्पिटल में गुरुवार तड़के सुबह करीब 4 बजे अचानक भीषण आग भड़क उठी। आग अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू (ICU) वार्ड में लगी, जिसके बाद देखते ही देखते पूरी इमारत में दमघोंटू और जहरीला धुआं फैल गया। इस अग्निकांड की चपेट में आने से अब तक 10 मरीजों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, हालांकि अब तक पांच की ही आधिकारिक पुष्टि हुई है। जबकि बचाए गए कई मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है। नवभारत टाइम्स के इस पेज पर आपको मुजफ्फरपुर हादसे से जुड़े ताजा अपडेट्स मिल रहे हैं। नई जानकारी के लिए पेज को रिफ्रेश करते रहें।
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी की जा रही है और सरकार इस मुद्दे पर जवाब देने से बच रही है। विपक्ष का कहना है कि अगर अस्पतालों में नियमित फायर ऑडिट, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और सुरक्षा उपकरणों की प्रभावी निगरानी होती, तो ऐसे हादसों को रोका जा सकता था। नेताओं ने स्वास्थ्य मंत्री से घटना पर स्पष्ट बयान देने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। विपक्ष ने इसे प्रशासनिक संवेदनहीनता बताते हुए कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि आग लगने के वास्तविक कारण क्या थे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठाने जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थानों में अग्नि सुरक्षा केवल औपचारिकता नहीं हो सकती। बिजली व्यवस्था, ऑक्सीजन पाइपलाइन, आपातकालीन निकास द्वार और फायर फाइटिंग सिस्टम की नियमित जांच आवश्यक है। मुजफ्फरपुर की यह घटना एक बार फिर स्वास्थ्य ढांचे की सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को सामने लेकर आई है।
अब सभी की नजरें सरकार की आगामी कार्रवाई, जांच रिपोर्ट और स्वास्थ्य मंत्री की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं। यह मामला केवल एक हादसे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बिहार के स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा प्रबंधन, प्रशासनिक जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।