आस्था का महापर्व: कल खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट, नियमों का पालन अनिवार्य
उत्तराखंड , 22 अप्रैल 2026 । उत्तराखंड में स्थित पवित्र केदारनाथ धाम के कपाट कल श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। हर साल की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए यहां पहुंचेंगे। कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की रौनक अपने चरम पर होगी।
22 अप्रैल सुबह कपाट खुलने के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी धाम पहुंचेंगे तथा परंपरानुसार धार्मिक अनुष्ठान एवं पूजा-अर्चना में सम्मिलित होंगे। कपाट खुलने की तिथि जैसे जैसे निकट आ रही है, श्रद्धालु बेहद उत्साहित हैं। देश-विदेश से इस अवसर पर 22756 श्रद्धालु दर्शन करेंगे। शासन, प्रशासन और केदारनाथ बदरीनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से श्रद्धालुओं की सुगम, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से सड़कों की मरम्मत एवं सुचारू यातायात व्यवस्था, पैदल मार्ग पर शौचालय, आवास, खान-पान एवं पेयजल की सुविधा, विद्युत एवं सोलर लाइट की समुचित व्यवस्था तथा प्रत्येक दो किलोमीटर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सा सहायता केंद्र (एमआरपी) की स्थापना की गई है।

प्रशासन ने इस बार श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यात्रा को सुगम बनाने के लिए कई सख्त नियम लागू किए हैं। इन नियमों का पालन करना सभी यात्रियों के लिए अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें यात्रा से रोका भी जा सकता है।
सबसे पहले, यात्रा पर जाने से पहले ऑनलाइन या ऑफलाइन पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराना जरूरी है। बिना रजिस्ट्रेशन के किसी भी श्रद्धालु को केदारनाथ जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र (Health Certificate) भी अनिवार्य किया गया है, क्योंकि ऊंचाई वाले क्षेत्र में ऑक्सीजन की कमी और मौसम की अनिश्चितता यात्रियों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
प्रशासन ने मौसम को देखते हुए यात्रियों को पर्याप्त गर्म कपड़े, रेनकोट और जरूरी दवाइयां साथ रखने की सलाह दी है। साथ ही, ट्रेकिंग मार्ग पर साफ-सफाई बनाए रखना और प्लास्टिक का उपयोग न करने जैसे पर्यावरणीय नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा।
यात्रा के दौरान निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करना होगा और सुरक्षा बलों के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य रहेगा। किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सरकार और प्रशासन का उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और यादगार यात्रा का अनुभव मिले। ऐसे में सभी यात्रियों से अपील की गई है कि वे नियमों का पालन करें और इस पवित्र यात्रा को सफल बनाएं।