विकास की रफ्तार पर मंथन—बिहार के मुख्य सचिव की अहम बैठक में लिगेसी और थ्रस्ट जिलों की समीक्षा

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पटना , 18 अप्रैल 2026 । बिहार में विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से राज्य के मुख्य सचिव ने एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई, जिसमें 4 लिगेसी और थ्रस्ट जिलों में चल रही योजनाओं और परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। इस बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और जमीनी स्तर पर हो रहे कार्यों की प्रगति का आकलन किया गया।

वर्ष 2020 के बाद से नक्सलियों द्वारा पुलिस पर किसी भी हिंसक हमले की घटना नहीं हुई है। जनवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच सघन अभियानों के तहत 256 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया है। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपकर् परियोजना (आरसीपीएलडब्लूईए)योजना के तहत स्वीकृत 153 सड़कों (1980.8 किमी) में से 132 सड़कों (1825.12 किमी) और 74 पुलों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि जिन जिलों को विशेष श्रेणी—लिगेसी और थ्रस्ट—में रखा गया है, वहां विकास योजनाओं का क्रियान्वयन तेज और प्रभावी तरीके से हो। इन जिलों में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क निर्माण, पेयजल और रोजगार से जुड़ी परियोजनाओं पर खास ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि आम जनता को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।

इस दौरान कई परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें कुछ क्षेत्रों में संतोषजनक कार्य की सराहना की गई, जबकि जहां कार्य धीमा पाया गया, वहां संबंधित अधिकारियों को सुधार के निर्देश दिए गए। बैठक में यह भी जोर दिया गया कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की नियमित समीक्षा बैठकें प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करती हैं और विकास कार्यों में गति लाने में मदद करती हैं। लिगेसी और थ्रस्ट जिलों पर विशेष फोकस से क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और संतुलित विकास सुनिश्चित करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।

आने वाले समय में इन जिलों में विकास परियोजनाओं की प्रगति पर नजर बनाए रखने के लिए और भी सख्त मॉनिटरिंग तंत्र लागू किए जाने की संभावना है, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंच सके।

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