12 साल बाद बड़ा बदलाव—अमेरिकी सेना ने सीरिया से वापसी पूरी की

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दमिश्क, 17 अप्रैल 2026 । मध्य-पूर्व की भू-राजनीति में बड़ा मोड़ आया है, जहां अमेरिकी सेना ने लगभग 12 साल बाद सीरिया से अपनी सैन्य मौजूदगी समाप्त कर दी है। यह फैसला क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर दूरगामी असर डाल सकता है।

अप्रैल 2026 में हसाका के कसराक एयरबेस से आखिरी अमेरिकी काफिला निकल गया। इसके बाद सीरियाई सरकार ने सभी बेस अपने कब्जे में ले लिए। सीरियाई विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह कदम देश को एकजुट करने और पूरे इलाके पर सरकार का नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में बड़ा मोड़ है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की कि करीब 2000 सैनिक जॉर्डन जा रहे है।

अमेरिका ने हसाका, रुमैलान और देइर एज-जोर में मौजूद कम से कम सात बड़े ठिकाने खाली किए। आखिरी ठिकाना कसराक एयरबेस था। अब इस पर सीरियाई सेना का नियंत्रण है।

अमेरिका की सेना 2010 के दशक की शुरुआत में सीरिया में सक्रिय हुई थी, जहां उसका मुख्य उद्देश्य आतंकवादी संगठनों, खासकर आईएसआईएस के खिलाफ अभियान चलाना और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना था। लंबे समय तक सैन्य अभियान चलाने के बाद अब यह वापसी एक नई रणनीतिक दिशा को दर्शाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से सीरिया में शक्ति संतुलन बदल सकता है। स्थानीय और क्षेत्रीय ताकतों—जैसे रूस, ईरान और तुर्की—की भूमिका और प्रभाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, अमेरिका ने यह स्पष्ट किया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेगा और जरूरत पड़ने पर अन्य तरीकों से कार्रवाई जारी रखेगा।

यह वापसी न केवल सैन्य रणनीति में बदलाव का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अमेरिका अब अपने वैश्विक सैन्य संसाधनों को नए प्राथमिक क्षेत्रों में केंद्रित करना चाहता है।

सीरियाई सरकार और SDF के बीच समझौता

इस बीच, सीरिया सरकार और SDF के बीच हुए समझौते के बाद कुर्द लड़ाकों को राष्ट्रीय सेना में शामिल किया जा रहा है। हसाका और क़ामिशली जैसे शहरों में सरकारी बल तैनात हो चुके हैं और सीमाई इलाकों पर भी दमिश्क का नियंत्रण बढ़ा है।

इसी साल दोनों पक्षों के बीच झड़पें भी हुई थीं, जिसके बाद मार्च में एक नया समझौता हुआ। इसके तहत SDF और कुर्द प्रशासनिक ढांचे को धीरे-धीरे राज्य में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई।

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