Z+ सिक्योरिटी का पूरा गणित: NSG कमांडो से लेकर बुलेटप्रूफ काफिले तक, क्यों VIPs को मिलती है इतनी कड़ी सुरक्षा

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पटना , 02 अप्रैल 2026 । भारत में वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था कई स्तरों में बांटी गई है, जिसमें Z+ सुरक्षा सबसे उच्च श्रेणी में मानी जाती है। हाल ही में यह चर्चा इसलिए तेज हुई क्योंकि Nitish Kumar को मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी Z+ सुरक्षा मिलने की बात सामने आई है।

विभाग की ओर से भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि नीतीश कुमार को बिहार विशेष सुरक्षा अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के अंतर्गत सुरक्षा दी जाएगी। गृह विभाग द्वारा जारी पत्र में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि मुख्यमंत्री राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं और जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर समीक्षा की गई और उन्हें जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा देने का निर्णय लिया गया।

Z+ सुरक्षा बेहद खास और संवेदनशील व्यक्तियों को दी जाती है, जिनकी जान को गंभीर खतरा माना जाता है। इस श्रेणी में आमतौर पर करीब 50 से 55 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं, जिनमें National Security Guard (NSG) के अत्याधुनिक प्रशिक्षित कमांडो भी शामिल होते हैं। ये कमांडो हर समय ‘क्लोज प्रोटेक्शन’ में रहते हैं और किसी भी हमले की स्थिति में तुरंत जवाब देने के लिए तैयार रहते हैं।

इस सुरक्षा में केवल जवान ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक उपकरण और व्यवस्थाएं भी शामिल होती हैं। वीआईपी के काफिले में बुलेटप्रूफ गाड़ियां, एस्कॉर्ट वाहन, पायलट गाड़ी और फॉलो कार होती हैं। इसके अलावा, रूट की पहले से जांच (Route Sanitization), कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा जांच और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय भी इस सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा होता है।

Z+ सुरक्षा केवल पद के आधार पर नहीं, बल्कि खतरे के आकलन (Threat Perception) के आधार पर दी जाती है। यह आकलन केंद्रीय एजेंसियां जैसे इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) करती हैं। अगर किसी व्यक्ति को आतंकवादी, आपराधिक या राजनीतिक कारणों से खतरा होता है, तो उसे इस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जा सकती है।

भारत में सुरक्षा के अन्य स्तरों में X, Y, Y+ और Z श्रेणियां भी शामिल हैं, लेकिन Z+ सबसे उच्च स्तर की सुरक्षा मानी जाती है। इसमें सुरक्षा का दायरा इतना व्यापक होता है कि व्यक्ति की यात्रा, सार्वजनिक कार्यक्रम और निजी गतिविधियों तक पर नजर रखी जाती है।

नीतीश कुमार को पद छोड़ने के बाद भी यह सुरक्षा मिलने का कारण उनका राजनीतिक कद, पूर्व पद और संभावित सुरक्षा खतरे हो सकते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत में वीआईपी सुरक्षा केवल पद से नहीं बल्कि जोखिम के स्तर से तय होती है।

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