देहरादून , 23 मार्च 2026 । उत्तराखंड में लंबे इंतजार के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंत्रिमंडल विस्तार के उपरांत विभागों का बहुप्रतीक्षित बंटवारा कर दिया है। इस कदम को राज्य सरकार की कार्यप्रणाली को तेज और प्रभावी बनाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
इस बंटवारे में उन्होंने एक ओर जहां गृह, कार्मिक, सामान्य प्रशासन, नियुक्ति एवं प्रशिक्षण और सूचना एवं जनसंपर्क जैसे बेहद अहम विभाग अपने पास रखे हैं, वहीं दूसरी ओर अन्य मंत्रियों को जिम्मेदारियां सौंपकर प्रशासनिक संतुलन साधने की कोशिश की है। दरअसल, अब तक मुख्यमंत्री 35 से अधिक विभागों का कार्यभार संभाल रहे थे। लंबे समय से रिक्त पड़े मंत्रिमंडल के पदों को भरने के बाद यह विभागीय पुनर्गठन किया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री ने रणनीतिक तौर पर उन विभागों को अपने पास रखा है, जो शासन की धुरी माने जाते हैं और जिनके जरिए सरकार की नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और कानून-व्यवस्था पर सीधा नियंत्रण रहता है।
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कई नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन विभागों के आवंटन में देरी के चलते प्रशासनिक स्तर पर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। अब विभागों के बंटवारे के साथ ही सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह विकास कार्यों को गति देने और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से तय करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस बंटवारे में अनुभव और क्षेत्रीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है। वरिष्ठ मंत्रियों को महत्वपूर्ण विभाग जैसे वित्त, गृह, ऊर्जा और लोक निर्माण दिए गए हैं, जबकि नए मंत्रियों को भी ऐसे विभाग सौंपे गए हैं जहां वे अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर सकें। इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी बल्कि राजनीतिक संतुलन भी बना रहेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने पास कुछ अहम विभाग बरकरार रखे हैं, जो उनकी प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं। इनमें आमतौर पर कार्मिक, सतर्कता, सूचना और अन्य रणनीतिक विभाग शामिल होते हैं, जिनके माध्यम से शासन की निगरानी और समन्वय सुनिश्चित किया जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विभागीय बंटवारा आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए भी किया गया है, ताकि सरकार की छवि मजबूत हो और जनता के बीच विकास कार्यों का प्रभाव दिखे। साथ ही, विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर सरकार ने संतुलन बनाने की कोशिश की है।
कुल मिलाकर, यह बंटवारा उत्तराखंड सरकार के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां अब सभी मंत्रियों की जिम्मेदारियां तय हो चुकी हैं और उनसे अपेक्षा की जा रही है कि वे अपने-अपने विभागों में तेजी से काम करते हुए राज्य के विकास को आगे बढ़ाएं।