बढ़ती गर्मी के बीच मजरूवाल गांव में गहराया पेयजल संकट, ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी

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उत्तराखंड, 17 मार्च 2026 । तेज होती गर्मी के साथ मजरूवाल गांव में पेयजल संकट गंभीर रूप लेता जा रहा है। गांव के हैंडपंप और ट्यूबवेल सूखने की कगार पर हैं, जिससे रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी जुटाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। महिलाओं और बच्चों को दूर-दूर तक पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनकी दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है।

इन दिनों स्रोत पर पानी कम होने से इसका सबसे अधिक असर मजरूवाल गांव पर पड़ रहा है। जिला पंचायत सदस्य सुनील जुयाल, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सबल सिंह चौहान ने बताया कि पानी की आपूर्ति कम होने से सभी घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। ऐसी स्थिति में लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। अधिक गर्मी बढ़ने पर समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है। प्रेमलाल जुयाल का कहना है कि स्थानीय लोग वर्षों से कांगुड़ा से पंपिंग योजना बनाने की मांग कर रहे हैं। कांगुड़ा में पर्याप्त पानी है। पंपिंग योजना बनने से गुसाईं पट्टी के अधिकांश गांवों को पर्याप्त पानी मिल सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल गर्मियों में पानी की समस्या बढ़ती है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा खराब हैं। कई इलाकों में सुबह-सुबह ही पानी खत्म हो जाता है और दिनभर लोगों को बूंद-बूंद के लिए इंतजार करना पड़ता है। पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया है, जिससे खेती और पशुपालन पर भी असर पड़ रहा है।

स्थानीय प्रशासन द्वारा टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। लोगों का आरोप है कि टैंकर समय पर नहीं पहुंचते और कई बार आधे रास्ते से ही लौट जाते हैं, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। इसके अलावा, पाइपलाइन व्यवस्था भी कई जगहों पर खराब पड़ी है, जिसकी मरम्मत लंबे समय से नहीं हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भूजल स्तर में लगातार गिरावट, अनियंत्रित दोहन और वर्षा की कमी इस संकट के मुख्य कारण हैं। यदि समय रहते जल संरक्षण और प्रबंधन के ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की है, जिसमें नई पाइपलाइन बिछाना, जलाशयों का निर्माण और वर्षा जल संचयन जैसी योजनाओं को लागू करना शामिल है। फिलहाल, मजरूवाल गांव के लोग गर्मी के इस मौसम में पानी की किल्लत से जूझने को मजबूर हैं।

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