लॉरेंस बिश्नोई इंटरव्यू मामले में बर्खास्त पंजाब पुलिस का DSP पहुंचा हाईकोर्ट,

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चंडीगढ़,17 जनवरी। पंजाब के पूर्व डीएसपी गुरशेर सिंह संधू ने अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट ने उसकी याचिक पर पंजाब सरकार और गृह विभाग को नोटिस जारी किया। संधू पर गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के पुलिस लॉकअप में इंटरव्यू के मामले में कार्रवाई हुई थी। संधू का कहना है कि उन्हें इस पूरे विवाद में बलि का बकरा बनाया गया है। जस्टिस जगमोहन बंसल की अदालत 20 फरवरी को मामले की अगली सुनवाई करेगी। गुरशेर सिंह संधू 2012 से 2015 तक बीएसएफ में सहायक कमांडेंट रह चुके हैं। वो पंजाब पुलिस में डीएसपी पद पर तैनात थे। उन्हें गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के साथ पुलिस हिरासत में इंटरव्यू के मामले में बर्खास्त कर दिया गया था। 2 जनवरी को, पंजाब सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 311 (2) के तहत दिए गए अधिकारों का प्रयोग करते हुए संधू को डीएसपी के पद से बर्खास्त कर दिया। अब संधू ने इस बर्खास्तगी को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

बर्खास्तगी को बताया गलत
संधू का तर्क है कि उनके खिलाफ पहले ही विभागीय कार्यवाही/जांच शुरू हो चुकी थी। इसलिए राज्य सरकार अनुच्छेद 311 (2) का इस्तेमाल नहीं कर सकती थी। उनका कहना है कि उन्होंने राज्य के अधिकारियों को कई बार निवेदन भेजे थे। वह कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए दस्तावेज मांग रहे थे। संधू ने यह भी कहा कि उन्हें चार्जशीट कभी नहीं मिली। उनके वकील ने दलील दी कि बिना जांच के बर्खास्तगी का आदेश कानून के स्थापित सिद्धांतों के खिलाफ है। वकील के मुताबिक कि बर्खास्तगी के आदेश में दिए गए कारण अनुच्छेद 311 के तहत जांच से छूट देने की शक्ति का इस्तेमाल करने का आधार नहीं बन सकते।

खुद को बेकसूर बताया
अपनी याचिका में संधू ने यह भी बताया कि बिश्नोई को तिहाड़ जेल से पंजाब लाने के समय उनकी सुरक्षा की निगरानी पंजाब पुलिस के एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) के ADGP द्वारा की जा रही थी। बिश्नोई गायक शुभदीप सिंह उर्फ सिद्धू मूसेवाला की हत्या का संदिग्ध था। इसलिए जून 2022 में जांच के लिए उसे पंजाब के अनुरोध पर CIA मुख्यालय खरड़ ले जाया गया था। संधू का दावा है कि बिश्नोई के खरड़ आने और मूसेवाला की हत्या के बाद, उन्हें डीएसपी (सीआईडी) मोहाली के रूप में तैनात किया गया था। इस पूरे मामले में खुद को बेकसूर बताते हुए संधू ने कहा कि उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है। अब देखना होगा कि 20 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई में हाईकोर्ट क्या फैसला सुनाता है।

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