यूपी में छोटे प्लॉट वालों को बड़ी राहत

6000 वर्गमीटर तक के लिए आसान हुई प्रक्रिया, किस्तों पर ब्याज भी घटा

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लखनऊ, 26  सितंबर 2026 । उत्तर प्रदेश में जमीन या प्लॉट से जुड़े मामलों में लोगों को बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत छोटे भूखंडों के मामलों में राज्य सरकार की मंजूरी की अनिवार्यता को कम किया गया है। वहीं, किस्तों में शुल्क जमा करने वालों के लिए ब्याज की गणना के तरीके में भी बदलाव किया गया है।

इन बदलावों का मकसद भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े मामलों की प्रक्रिया को आसान और तेज करना बताया गया है। इससे छोटे प्लॉट के मालिकों को लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से राहत मिलने की उम्मीद है।

इसमें सबसे बड़ी राहत यह है कि किस्तों में भुगतान पर कम ब्याज देना पड़ेगा। किस्तों में ब्याज अब सीधे 12 प्रतिशत वार्षिक की बजाय मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (एमएलसीआर) के साथ 1 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज देना होगा। इससे आवेदक को काफी राहत मिलेगी।

6000 वर्गमीटर तक के प्लॉट पर बड़ी राहत

नए नियमों में 6000 वर्गमीटर या उससे कम क्षेत्रफल वाले भूखंडों के लिए अहम बदलाव किया गया है। ऐसे मामलों में राज्य सरकार से मंजूरी लेने की अनिवार्यता नहीं होगी, लेकिन इसके लिए संबंधित भू-उपयोग श्रेणी में संचयी परिवर्तन का प्रतिशत सरकार की निर्धारित सीमा के भीतर होना जरूरी है।

ऐसे आवेदन अब संबंधित विकास प्राधिकरण के बोर्ड स्तर पर ही निपटाए जा सकेंगे। इससे छोटे प्लॉट से जुड़े मामलों में फैसला लेने की प्रक्रिया पहले की तुलना में कम समय लेने वाली हो सकती है।

सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम होने की उम्मीद

नियमों में बदलाव का एक अहम उद्देश्य प्रक्रिया का विकेंद्रीकरण है। पहले कुछ मामलों में राज्य स्तर पर मंजूरी की जरूरत पड़ने से प्रक्रिया लंबी हो सकती थी। अब पात्र छोटे भूखंडों के आवेदन विकास प्राधिकरण के स्तर पर ही निस्तारित किए जा सकेंगे।

इससे आवेदकों को अलग-अलग स्तर के कार्यालयों में फाइल आगे बढ़ाने के लिए जाने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, आवेदन की स्वीकृति संबंधित नियमों और निर्धारित शर्तों के आधार पर ही होगी।

किस्तों पर भुगतान करने वालों को भी फायदा

सरकार ने भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क को किस्तों में जमा करने पर लगने वाले ब्याज के नियम में भी बदलाव किया है। पहले जहां 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का प्रावधान था, वहीं अब ब्याज की गणना MCLR यानी Marginal Cost of Funds Based Lending Rate + 1 प्रतिशत के आधार पर होगी।

इस बदलाव से ब्याज दर बाजार की बैंकिंग दरों के अनुरूप बदल सकती है। यानी किस्तों में शुल्क जमा करने वाले आवेदकों पर पहले की निर्धारित 12 प्रतिशत वार्षिक दर की तुलना में अलग ब्याज भार पड़ सकता है।

आपत्ति और सुझाव की प्रक्रिया में भी बदलाव

नए नियमों में प्रस्तावित भू-उपयोग परिवर्तन की सूचना प्रकाशित करने की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। अब पहले की तरह दो समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशित करना अनिवार्य नहीं होगा। कम से कम एक समाचार पत्र और संबंधित प्राधिकरण की वेबसाइट पर सूचना देने का प्रावधान किया गया है।

हालांकि, आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने के लिए न्यूनतम 15 दिन की अवधि बरकरार रखी गई है। इसका मतलब है कि प्रभावित पक्षों को प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति या सुझाव देने का अवसर मिलता रहेगा।

छह सदस्यीय कमेटी करेगी आपत्तियों पर विचार

आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की जाएगी। इसकी अध्यक्षता संबंधित विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष करेंगे।

समिति में जिला मैजिस्ट्रेट स्तर के नामित अधिकारी, नगर आयुक्त, सहयुक्त नियोजक, मंडलायुक्त के प्रतिनिधि और मुख्य नगर नियोजक स्तर के अधिकारी शामिल होंगे। इससे भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े प्रस्तावों की जांच और आपत्तियों के निस्तारण के लिए एक निर्धारित व्यवस्था बनेगी।

शुल्क व्यवस्था में भी बदलाव

संशोधित नियमों में शुल्क से संबंधित अनुसूची में भी बदलाव किया गया है। अलग-अलग परिस्थितियों और भू-उपयोग के आधार पर लागू शुल्क में फेरबदल किया गया है। संबंधित प्राधिकरणों की वेबसाइट पर विस्तृत शुल्क दरों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

कुल मिलाकर नए नियमों में छोटे भूखंडों के मामलों को स्थानीय स्तर पर निस्तारित करने, किस्तों पर ब्याज की गणना बदलने और आपत्ति प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया गया है।

किन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है?

इस बदलाव का सीधा संबंध उन लोगों से है जिनके भूखंड का भू-उपयोग बदलने की प्रक्रिया नियमों के दायरे में आती है। खासतौर पर 6000 वर्गमीटर या उससे कम क्षेत्रफल वाले पात्र भूखंडों के मालिकों को राज्य स्तर की मंजूरी से राहत मिल सकती है।

वहीं, जिन आवेदकों को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क किस्तों में जमा करना है, उनके लिए ब्याज गणना में बदलाव महत्वपूर्ण है। हालांकि वास्तविक देय ब्याज संबंधित समय की MCLR और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।

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