राम गोविंद चौधरी के निधन पर भावुक हुए अखिलेश यादव,

बोले- समाजवादी आंदोलन और पार्टी को बड़ी क्षति

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लखनऊ, 26  सितंबर 2026 । समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी के निधन से पार्टी और उनके समर्थकों में शोक का माहौल है। 25 सितंबर 2026 की रात लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में उनका निधन हुआ। शनिवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लखनऊ के निशातगंज स्थित आवास पहुंचे और राम गोविंद चौधरी के पार्थिव शरीर पर समाजवादी पार्टी का झंडा रखकर अंतिम श्रद्धांजलि दी। इस दौरान अखिलेश यादव भावुक नजर आए।

अखिलेश ने एक्स पर लिखा कि हमारे बीच वो महान समाजवादी प्रकाश-स्तंभ राम गोविंद चौधरी नहीं रहे, जिन्होंने जय प्रकाश नारायण और भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की अगुवाई में समाजवादी मूल्यों, सिद्धांतों और लक्ष्यों की मशाल सदैव प्रज्ज्वलित रखी। उन्होंने कहा कि बलिया की क्रांतिकारी धरती से उठकर छात्र राजनीति के कठिन मार्ग से होते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तक उनकी आवाज और अकाट्य तर्कों का सदैव सम्मान हुआ।

अखिलेश यादव ने बताई बड़ी क्षति

श्रद्धांजलि देने के बाद अखिलेश यादव ने राम गोविंद चौधरी के लंबे राजनीतिक जीवन और समाजवादी आंदोलन में उनकी भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा कि चौधरी उस पीढ़ी के नेताओं में थे, जब समाजवाद की पहचान को मजबूत करने का दौर था।

अखिलेश यादव ने कहा कि राम गोविंद चौधरी ने समाजवादी आंदोलन के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया और उनका जीवन संघर्ष से भरा रहा। उनके निधन को उन्होंने समाजवादी आंदोलन और समाजवादी पार्टी के लिए बड़ी क्षति बताया।

अखिलेश यादव शनिवार को राम गोविंद चौधरी के लखनऊ स्थित आवास पहुंचे। उन्होंने पार्थिव शरीर पर समाजवादी पार्टी का झंडा रखा और पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भी मौजूदगी रही।

राम गोविंद चौधरी के निधन की खबर सामने आने के बाद से ही समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से शोक संदेश जारी किए जा रहे हैं। अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ था सफर

राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। वे समाजवादी आंदोलन से जुड़े और लंबे समय तक उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे। 1977 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव जीता और उत्तर प्रदेश विधानसभा में पहुंचे। इसके बाद उन्होंने कई दशकों तक सक्रिय राजनीति में भूमिका निभाई।

वह मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री रहे। 2012 में बांसडीह विधानसभा सीट से जीत के बाद अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें बेसिक शिक्षा और समाज कल्याण सहित महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली। 2017 में बांसडीह से दोबारा जीतने के बाद उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया और 2022 तक उन्होंने इस पद की जिम्मेदारी निभाई।

आठ बार विधायक रहे राम गोविंद चौधरी

राम गोविंद चौधरी लंबे समय तक चुनावी राजनीति में सक्रिय रहे और आठ बार विधायक चुने गए। बलिया और पूर्वांचल की राजनीति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव भी रहे और संगठन से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहे।

उनके राजनीतिक जीवन में समाजवादी आंदोलन, छात्र राजनीति और विधानसभा की सक्रिय भूमिका प्रमुख रही। विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने शिक्षा, समाज कल्याण और अन्य जनहित से जुड़े मुद्दों को विधानसभा में उठाया।

राम गोविंद चौधरी के निधन पर केवल समाजवादी पार्टी ही नहीं, बल्कि दूसरे राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी शोक जताया। भाजपा विधायक केतकी सिंह ने भी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि राजनीतिक विचारधारा अलग होने के बावजूद चौधरी उनके लिए अभिभावक के समान थे। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि देने वालों में शामिल रहे।

इससे उनके लंबे राजनीतिक जीवन और विभिन्न दलों के नेताओं के साथ रहे सार्वजनिक संबंधों का भी पता चलता है।

समाजवादी पार्टी में लंबे समय तक निभाई भूमिका

राम गोविंद चौधरी ने समाजवादी पार्टी के संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण वह पार्टी की पुरानी पीढ़ी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे।

अखिलेश यादव ने भी उन्हें समाजवादी आंदोलन की उस पीढ़ी का नेता बताया, जिसने समाजवाद की पहचान स्थापित करने के दौर में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनके निधन के बाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से लगातार श्रद्धांजलि संदेश सामने आ रहे हैं।

बलिया से लखनऊ तक शोक का माहौल

राम गोविंद चौधरी के निधन की खबर के बाद उनके गृह क्षेत्र बलिया में भी शोक का माहौल है। लंबे समय तक बलिया की राजनीति में सक्रिय रहने के कारण उनके समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों ने उनके निधन पर संवेदना व्यक्त की है।

लखनऊ में उनके अंतिम दर्शन के लिए राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। अखिलेश यादव की श्रद्धांजलि के दौरान भी माहौल भावुक रहा।

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