पटना, 23 सितंबर 2026 । बिहार के जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ कथित बदसलूकी और छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस घटना को लेकर बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के आधार पर कहा कि यदि घटना का वीडियो सार्वजनिक नहीं होता, तो आम लोगों को इस मामले की जानकारी कैसे मिलती।
प्रशांत किशोर ने पुलिस की उस कार्रवाई पर भी सवाल उठाया, जिसमें नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उनका तर्क है कि अपराध की जानकारी सामने आने में सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो की भूमिका रही, इसलिए पुलिस को अपनी कार्रवाई में अपराध करने वालों और वीडियो प्रसारित करने वालों के बीच अंतर रखना चाहिए।
प्रशांत किशोर ने सरकार को लपेटा
प्रशांत किशोर ने कहा, ‘अगर ये कुकृत्य करने वालों ने खुद से वीडियो बनाकर जारी नहीं किया होता तो आपको हमको पता भी नहीं चलता और पुलिस प्रशासन कोशिश क्या कर रहा है? एडीजी लॉ एंड ऑर्डर का मैंने बयान देखा कि जो लोग भी वीडियो चला रहे हैं उन पर कार्रवाई की जाएगी। अरे भाई वीडियो नहीं चलता तो समाज को पता कैसे चलता कि आप लोग शराब माफिया बालू माफिया को संरक्षण देकर समाज किस तरह का कुकृत्य करा रहे हैं? तो वीडियो चलाने वाले पर कार्रवाई होगी लेकिन इस तरह का क्राइम करने वाले लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी तो मोदी जी का नारा है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ। हम कह रहे हैं कि मोदी जी का नया नारा है खुद से बेटी पढ़ाओ खुद से बेटी बचाओ सरकार कुछ नहीं करने वाली है।’
पुलिस ने वीडियो शेयर करने वालों पर क्यों की कार्रवाई?
जमुई पुलिस के मुताबिक सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर होने का मामला सामने आया। पुलिस ने ऐसे वीडियो को शेयर या रीपोस्ट नहीं करने की अपील की है।
रिपोर्टों के मुताबिक जमुई साइबर थाना में इस मामले में करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइलों को चिह्नित कर मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना कानून के तहत गंभीर विषय है। कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को गिरफ्तार कर पूछताछ किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
घटना के बाद आरोपियों पर भी कार्रवाई
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, घटना 19 सितंबर की शाम जमुई में हुई थी। पुलिस के मुताबिक एक नाबालिग छात्र और छात्रा के साथ कुछ लोगों ने रास्ते में कथित तौर पर मारपीट, अभद्रता और छेड़छाड़ की। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और POCSO समेत संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया। तीन लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है।
पुलिस की जांच में वीडियो में दिखाई देने वाले अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे संवेदनशील वीडियो को आगे प्रसारित न करें और जांच में पुलिस का सहयोग करें।
प्रशांत किशोर ने सरकार की कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने जमुई की घटना को बिहार में कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इससे पहले भी उन्होंने इस घटना को लेकर बिहार सरकार की आलोचना की थी और कहा था कि ऐसी घटनाएं प्रशासन के सामने गंभीर चुनौती पेश करती हैं।
उनके बयान के बाद जमुई मामले पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। हालांकि, घटना की जांच अभी जारी है और आरोपों तथा राजनीतिक बयानों को न्यायिक रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
नाबालिग की पहचान साझा करना कानूनन गंभीर मामला
इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू पीड़िता की निजता का है। पुलिस ने स्पष्ट रूप से लोगों से अपील की है कि वे ऐसा कोई वीडियो, फोटो या पोस्ट साझा न करें जिससे नाबालिग की पहचान उजागर हो। मीडिया रिपोर्टों में भी पीड़िता की पहचान को सार्वजनिक न करने पर जोर दिया गया है।
इसलिए घटना से जुड़े वीडियो को दोबारा पोस्ट या प्रसारित करने के बजाय पुलिस की आधिकारिक जांच और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा करना महत्वपूर्ण है।