नई दिल्ली, 22 सितंबर 2026 । सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार नई योजनाओं और प्रोत्साहनों पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में 3 किलोवाट (3KW) क्षमता वाले सोलर प्लांट को लेकर बड़ी घोषणा सामने आई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पात्र लाभार्थियों को सोलर प्लांट लगाने के लिए सरकार की ओर से ₹1.56 लाख तक की सहायता दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य घरों की बिजली जरूरतों को सौर ऊर्जा से पूरा करने के साथ-साथ बिजली के खर्च को कम करना है।
सरकार का फोकस अब केवल व्यक्तिगत मकानों तक सीमित नहीं है। योजना के दायरे में ग्रुप हाउसिंग सोसायटीज को भी शामिल करने की बात कही गई है। इससे अपार्टमेंट और बहुमंजिला आवासीय परिसरों में रहने वाले लोगों के लिए भी सौर ऊर्जा अपनाने का रास्ता आसान हो सकता है।
रेखा गुप्ता ने पीएम सूर्य घर योजना के तहत लॉन्च किया पोर्टल
सीएम ने कहा कि ऐसे घरेलू उपभोक्ता जिनकी औसत मासिक बिजली खपत 400 यूनिट तक है, उनके लिए 3 किलोवॉट तक का रूफटॉप सोलर सिस्टम बिना शुरुआती खर्च के लगाने की व्यवस्था की जा रही है। केंद्र की ओर से 78 हजार रुपये और दिल्ली सरकार की ओर से इतनी ही राशि की सब्सिडी दी जाएगी। उन्होंने ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर जल्द पंजीकरण कराने की अपील की। योजना के तहत 2.30 लाख घरों को रूफटॉप सोलर से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। सीएम ने बताया कि योजना में ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों के कॉमन एरिया और खुले स्थानों को भी शामिल किया गया है। इनके लिए राज्य की सहायता को 2 हजार रुपये प्रति किलोवॉट से बढ़ाकर 11 हजार रुपये प्रति किलोवॉट किया गया है। वहीं, छोटे घरों की जरूरत को देखते हुए 2 किलोवॉट तक के छोटे रूफटॉप सिस्टम को भी बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार ने ऐसे सिस्टम लगाने वाले उपभोक्ताओं का हिस्सा 50 प्रतिशत तक रखने का लक्ष्य तय किया है।
घर की बिजली जरूरतों में सोलर प्लांट की अहम भूमिका
3KW का रूफटॉप सोलर प्लांट सामान्य घरेलू बिजली जरूरतों के लिए उपयोगी क्षमता मानी जाती है। सोलर पैनल दिन के समय सूर्य की रोशनी से बिजली तैयार करते हैं। इससे घर की बिजली खपत का एक हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकता है।
सोलर प्लांट लगाने के बाद बिजली बिल में संभावित बचत सिस्टम की क्षमता, स्थानीय धूप, बिजली की खपत, नेट मीटरिंग के नियम और अन्य तकनीकी परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसलिए लाभार्थियों को योजना के तहत लागू नियमों और पात्रता शर्तों की जानकारी लेकर ही आवेदन करना चाहिए।
सरकार का सौर ऊर्जा पर बढ़ता जोर
केंद्र और राज्य सरकारें पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने पर जोर दे रही हैं। रूफटॉप सोलर इसी दिशा में महत्वपूर्ण विकल्प बनकर सामने आया है। घरेलू स्तर पर सोलर प्लांट लगाने से उपभोक्ता अपनी बिजली जरूरतों का कुछ हिस्सा स्वयं पूरा कर सकते हैं।
सरकारी सहायता मिलने से सोलर सिस्टम लगाने की शुरुआती लागत का बोझ कम हो सकता है। यही वजह है कि सब्सिडी आधारित योजनाओं को आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
सोलर प्लांट के लिए आवेदन करने वाले लोगों को योजना की आधिकारिक पात्रता, सब्सिडी की राशि, आवश्यक दस्तावेज, पंजीकृत विक्रेता और इंस्टॉलेशन से जुड़े नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए। ग्रुप हाउसिंग सोसायटीज के मामले में सामूहिक बिजली कनेक्शन, कॉमन एरिया की बिजली खपत और उपलब्ध रूफटॉप स्पेस जैसी तकनीकी जरूरतें भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
सरकार की ओर से दी जाने वाली ₹1.56 लाख की सहायता किन शर्तों और किस क्षमता के सिस्टम पर लागू होगी, इसका लाभ लेने से पहले संबंधित आधिकारिक दिशा-निर्देशों को देखना जरूरी है।
बिजली बचत के साथ पर्यावरण को भी फायदा
रूफटॉप सोलर का विस्तार केवल बिजली बिल कम करने तक सीमित नहीं है। सौर ऊर्जा एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है और इसके इस्तेमाल से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। शहरों में बड़ी संख्या में घरों और हाउसिंग सोसायटीज की छतों पर सोलर पैनल लगाए जाने से स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिल सकता है।
सरकार द्वारा 3KW सोलर प्लांट पर सहायता और ग्रुप हाउसिंग सोसायटीज को योजना में शामिल करने की पहल इसी व्यापक सौर ऊर्जा विस्तार का हिस्सा है। आने वाले समय में यदि ज्यादा आवासीय परिसर इस व्यवस्था को अपनाते हैं, तो घरेलू और सामुदायिक स्तर पर सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ सकती है।